आगरालीक्स …आगरा के रेनबो कार्डियक केयर सेंटर में पश्चिमी उत्तर प्रदेश की पहली फ्रेक्शनल फ्लो रिसर्व (एफएफआर) यूनिट स्थापित की गई है। इससे कॉरेनरी आर्टिजी की ब्लॉकेज का पता लगाया जा सकता है। यह ब्लॉकेज कम है तो इसे दवाओं से ही ठीक किया जा सकता है, इसके लिए ओपन हार्ट सर्जरी और एंजियोग्राफी की जरूरत नहीं होगी।
रेनबो कार्डियक केयर सेंटर में पदमश्री डॉ प्रवीण चंद्रा ने बताया कि 35 से 40 की उम्र के बाद कॉरेनरी आर्टिज (दिल को खून की आपूर्ति करने वाली आर्टिज) में ब्लॉकेज शुरू हो जाती है। यह बढती रहती है, ब्लॉकेज बढ जाने पर सीने में दर्द सहित अन्य समस्याओं होने पर डॉक्टर को दिखाया जाता है। इस तरह के केस में एंजियोग्राफी की जाती है, ब्लॉकेज ज्यादा हैं तो ओपन हार्ट सर्जरी करनी होती है। इसका खर्चा बहुत अधिक आता है। वहीं, एफएफआर से कॉरेनरी आर्टिज की ब्लॉकेज का पता चल जाता है, यह भी जांच में आ जाता है कि कितनी आर्टिज में ब्लॉकेज है। यह ब्लॉकेज 70 फीसद तक या इससे कम है तो इसे दवाओं से ठीक कर दिया जाता है और ओपन हार्ट सर्जरी की जरूरत नहीं होती है। मगर, चुनिंदा सेंटरों पर ही एफएफआर यूनिट है। इससे ह्रदय रोगियों को एंजियोग्राफी और ओपन हार्ट सर्जरी करानी पड़ रही है, जबकि एफएफआर जांच से ब्लॉकेज का पता चलने पर दवा से भी इलाज संभव है। रेनबो कार्डियक केयर सेंटर में एफएफआर यूनिट में पहले एफएफआर टेस्ट के दौरान डॉ. प्रवीन चंद्रा के साथ उनकी टीम के डॉ मुकुल कौशिक, डॉ विनीत गर्ग, डॉ प्रवेज गोयल आदि मौजूद रहे।
ब्लॉकेज के यह हैं लक्षण
सीढी चढ़ने में सांस फूलना
थकान, बेहोशी, चक्कर
सीने में दर्द
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