आगरालीक्स… आगरा के शारदा ग्रुप के एचआईएमसीएस और पर्यटन पुलिस का मास्टर प्लान, भीख मांगने वाले बच्चे अपने हाथों से चीजें बनाएंगे और लोग उनसे तर्कसंगत व भावनात्मक खरीददारी करेंगे, पर्यटन स्थलों पर लपकागिरी बंद होगी, पढ़ें इस खबर में.

आप किसी चौराहे पर गाड़ी रोकते हैं और एक बच्चा आकर उस गाड़ी का शीशा साफ करने लगता है, कभी कोई थाली में देवी-देवताओं की फोटो और दीपक लेकर सामने खड़ा हो जाता है, आप मंदिर जाते हैं कोई बच्चा हाथ फैलाकर आपसे मांगता है। ऐसे ही जब कोई पर्यटक ताजमहल या अन्य ऐतिहासिक इमारतों का भ्रमण करने आता है तो आस-पास सामान बेचने वाले, रिक्शा चालकों या स्टे गाइड उसे घेर लेते हैं। इससे वह असहज हो जाता है। कई देशी-विदेशी पर्यटक इन दृश्यों को कैमरे में कैद करके भी ले जाते हैं। दोनों ही बातें शहर की छवि को धूमिल करती हैं। फिलहाल इसे बदलने की कोशिश शुरू हुई है। पर्यटन पुलिस, शारदा ग्रुप के हिन्दुस्तान इंस्टीट्यूट आफ मैनेजमेंट एंड कंप्यूटर स्टडीज और एसओएस ने मिलकर दो ऐसे प्राजेक्ट बनाए हैं जिनसे शहर की छवि को धूमिल होने से बचाया जा सके। एसीपी ताज सुरक्षा सैयद अरीब अहमद, एसडीएम अभय सिंह और एचआईएमसीएस के निदेशक डाॅ. नवीन गुप्ता की पहल पर रिसोर्स पर्सन के रूप में डाॅ. अंजू जैन, डाॅ. अभिलाषा सिंह, डाॅ. रिजू अग्रवाल, डाॅ. शांतनु साहू, डाॅ. गुंजन भटनागर और चंदन चौहान की अगुवाई में यह प्रोजेक्ट आगे बढ़ेंगे।
प्रोजेक्ट नंबर-1
इसके तहत सड़कों पर और मंदिरों के बाहर भीख मांगने वाले बच्चों को शिक्षण-प्रशिक्षण का रास्ता दिखाया जाएगा। एसीपी ताज सुरक्षा सैयद अरीब अहमद ने बताया कि अगर ये बच्चे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति की वजह से ऐसा करते हैं तो स्पष्ट है कि इतनी आसानी से इसे बदला नहीं जा सकता। यही वजह है कि इन्हें इस तरह का प्रशिक्षण देने की योजना है जिसमें ये बच्चे पर्यटन पुलिस के बाल मित्र केंद्र में प्रशिक्षण प्राप्त करें। बाल केंद्र में पर्यटन पुलिस के अधिकारी और एचआईएमसीएस के रिसोर्स पर्सन बच्चों को प्रशिक्षित करेंगे। उन्हें यह अहसास कराया जाएगा कि सड़कों पर इस तरह भीख मांगना या किसी से दुत्कार खाना उनकी नियति नहीं है। यह हालात बदल भी सकते हैं। इसके लिए बच्चों को हैंडीक्राॅफ्ट की टेªनिंग दी जाएगी। फिर बच्चों द्वारा तैयार की गई इन वस्तुओं को बाजार में लाने का काम एचआईएमसीएस के एमबीए छात्र करेंगे। डाॅ. गुप्ता का कहना है कि इस देश में सबसे बड़ी कठिनाई बच्चों द्वारा निर्मित इस सामग्री का विक्रय कराना ही होगा, क्योंकि इस देश में भावनात्मक खरीददार कम और तर्कसंगत ज्यादा हैं। इसलिए शुरूआत में वाॅलेंटियर्स उनका सामान खरीदकर मदद करेंगे। एमबीए छात्र तीन महीने में यह मार्केट मैनेजमेंट करेंगे कि आम ग्राहक इन वस्तुओं को खरीदें।
प्रोजेक्ट नंबर-2
ताजमहल पर आए दिन पर्यटकों के साथ अभद्र व्यवहार और लपकागिरी की शिकायतें सामने आती हैं। पर्यटन पुलिस अपने तरीके से सुधार में जुटी है, लेकिन अब यह काम मनोवैज्ञानिक रूप से भी होगा। इसके तहत स्टे गाइड, ई-रिक्शा चालकों और पुलिस कर्मियों के लिए एक विशेष प्रशिक्षण प्रोग्राम शुरू किया गया है। हर शुक्रवार को शाम पांच से छह की पाली में यह प्रशिक्षण प्रोग्राम डाॅ. नवीन गुप्ता द्वारा 30-30 लोगों के बैच में संचालित किए जाएंगे। पर्यटकों के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, ईमानदारी और सद्व्यवहार की भूमिका, अच्छे और मददगार व्यवहार के फायदे मुख्य विषय होंगे। लगातार चलने वाली इनक कार्यशालाओं में यह सिखाया जाएगा कि पर्यटकों पर झपट पड़ने से वे असहज हो जाते हैं और फिर ठहरने की वगह वापस जाने का विचार करते हैं। इससे किसी का भी फायदा नहीं होता। इसकी जगह अगर आप उनसे अच्छे से पेश आते हैं। जरूरत होने या उनके बुलाने पर ही उनके पास जाते हैं तो अच्छा प्रभाव पड़ता है। पर्यटक अगर रूकेंगे, अच्छा महसूस करेंगे तो इससे आपकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी न कि उनके वापस लौट जाने से।