आगरालीक्स…पूजा—पाठ के साथ और भी कई कारण हैं कि लोग व्रत रखते हैं, इंटरमिटेंट और ट्रेडिशनल फास्टिंग में है अंतर, सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. विनीत चौहान से जानें व्रत के वैज्ञानिक महत्व
आगरा में व्रत रखने वाले बड़ी संख्या में हैं। इन दिनों नवरात्रि के व्रत चल रहे हैं। पूजा—पाठ तो व्रत रखने का एक प्रमुख कारण होता ही है इसके अलावा भी कई कारणों से लोग व्रत रखते हैं। आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. विनीत चौहान ने आगरालीक्स से व्रत को लेकर फायदे—नुकसान, कितनी तरह के व्रत और इनके वैज्ञानिक महत्व पर बात की।
डॉ. चौहान कहते हैं कि फास्टिंग, जिसे व्रत या उपवास के नाम से भी जाना जाता है, अपनी इच्छा से खाना छोड़ने की एक प्रक्रिया है। लोग कई कारणों से व्रत रखते हैं जिसमें धार्मिक के अलावा स्वास्थ्य संबंधी कारण होते हैं।
इंटरमिटेंट फास्टिंग
व्रत भी कई प्रकार के होते हैं और इनके अपने ही फायदे हैं। जैसे इंटरमिटेंट फास्टिंग पिछले कुछ समय में फास्टिंग का सबसे लोकप्रिय प्रकार बन गया है। वजन घटाने के लिए इसका चलन काफी बढ़ गया है। इसमें लोग अपनी डाइट को एक तय समय के लिए सीमित करते हैं और फिर ज्यादा समय तक भूखे रहते है। इसमें अधिकांशत: 16 घंटे उपवास करने के बाद 8 घंटे में लोग कुछ खाते या पीते हैं।
एक्सटेंडेड फास्टिंग
व्रत रखने का एक तरीका है जिसे एक्सटेंडेड फास्टिंग कहा जाता है। इसमें लंबी समयावधि के लिए भूखा रहा जाता है। आम तौर पर इस दौरान लोग 24 से 72 घंटे तक उपवास रखते हैं। ज्यादातर लोग वजन कम करने के लिए एक्सटेंडेड फास्टिंग करते हैं।
रिलीजियस फास्टिंग
इसके बारे में अधिकांश लोग जानते ही हैं। फास्टिंग का यह सबसे प्रचलित तरीका है। कई धर्म के लोग इसे पूजा—पाठ और आध्यात्मक की वजह से करते हैं। अपनी—अपनी मान्यताओं के अनुसार खाते—पीते हैं।
वॉटर फास्टिंग
इसी तरह वॉटर फास्टिंग भी व्रत का एक तरीका है। इसमें लोग सिर्फ पानी पीते हैं तो खाना नहीं खाते। यह 24 घंटे से शुरू होकर तीन दिन तक का हो सकता है। कई लोग इसे धार्मिक मान्यताओं की वजह से तो कई लोग इसे वजन कम करने के लिए रखते हैं।
पार्शियल फास्टिंग
पार्शियल फास्टिंग में पूरी तरह से भूखा नहीं रहा जाता है, बल्कि कुछ खास तरह के खाद्य पदार्थ जैसे परहेज किया जाता है। अधिकांशत: कैलोरीज को अवॉइड करने की कोशिश होती है।
व्रत के फायदे
- शरीर को डिटॉक्सीफाई करे
- वजन कम करे
- पाचन तंत्र के लिए फायदेमंद
- स्किन के लिए भी है लाभकारी
- कोलेस्ट्रॉल को कम करता है उपवास
- ब्लड शुगर कम करने के लिए
- मानसिक और भावनात्मक लाभ
इंटरमिटेंट फास्टिंग और ट्रेडिशनल फास्टिंग में अंतर
— इंटरमिटेंट फास्टिंग अधिकांशत: वजन कम करने के लिए जबकि ट्रेडिशनल फास्टिंग धार्मिक कारण से की जाती है।
— इंटरमिटेंट फास्टिंग में टाइम का ध्यान रखा जाता है जबकि ट्रेडिशनल में तिथि समाप्ति का।
— इंटरमिटेंट फास्टिंग का उद्देश्य ही भूखा रहना है जबकि ट्रेडिशनल फास्टिंग का एकमात्र उद्देश्य भूखे रहना नहीं है।
— इंटरमिटेंट फास्टिंग में खाने के पोषण तत्वों को महत्व दिया जाता है जबकि ट्रेडिशनल फास्टिंग में परंपरागत खाना ही खाया जाता है।
— इंटरमिटेंट फास्टिंग यदि सावधानीपूर्वक न की जाए तो इसका नुकसान भी हो सकता है जबकि ट्रेडिशनल फास्टिंग का ऐसा कोई नुकसान नहीं है।
— इंटरमिटेंट फास्टिंग को नियमित रूप से किया जाता है जबकि ट्रेडिशनल फास्टिंग खास अवसर पर होती है।
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