आगरालीक्स …आगरा में यमुना की सिल्ट, स्लज और गंदगी की तुरंत सफाई के लिए सुप्रीम कोर्ट ने दिए आदेश। आगरा नाले में तब्दील हो चुकी है यमुना नदी। न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह शपथ पत्र जून के अन्त तक दाखिल करने होंगे और उसके लिए कोई भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जायेगा। अब यह मामला 11 जुलाई 2024 को न्यायालय द्वारा सुना जायेगा। (Agra News )
आगरा शहर से गुजर रही यमुना नदी में सिल्ट, स्लज और गन्दगी यदि नहीं हटायी गयी है तो उसे तुरन्त हटाया जाये। आगरा के लिए यह राहत भरा आदेश अर्थ दिवस पर सुप्रीम कोर्ट की न्यायमूर्ति अभय एस ओका एवं उज्जवल भुआन की बेंच के द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन को सुनने के उपरान्त याचिका सं0 171142 वर्ष 2019 पर पारित किया गया।
आगरा डवलपमेन्ट फाउन्डेशन के द्वारा वर्ष 2019 में प्रस्तुत याचिका पर सुनवाई शुरू की और याचिका में यमुना से सिल्ट, स्लज और गन्दगी को हटाने की बात पढ़ी, तो न्यायालय द्वारा स्पष्ट रूप से यह कहा गया कि यमुना की सफाई होनी चाहिए इस सम्बन्ध में कोई आपत्ति नहीं हो सकती है। न्यायालय द्वारा अधिवक्ता जैन से यह भी पूछा गया कि क्या यमुना नदी की डिसिल्टिंग पूर्व में हुयी जिसके जवाब में यह बताया गया कि यमुना की सफाई के लिए कदम नहीं उठाया गया है।
न्यायालय को यह भी बताया गया कि आर्किलॉजीकल सर्वे ऑफ इण्डिया द्वारा अपनी रिपोर्ट में यमुना की डिसिल्टिंग की सिफारिश की गयी है तथा जिलाधिकारी आगरा द्वारा बनायी गयी कमेटी ने भी डिसिल्टिंग के लिए कहा था। न्यायमित्र एडीएन राव एवं अतिरिक्ति सॉलिसिटर जनरल सुश्री एश्वर्या भाटी को सुनने के उपरान्त न्यायालय ने यह आदेश किया कि यदि आगरा शहर से गुजर रही यमुना नदी से सिल्ट, स्लज व गन्दगी को हटाने के कदम आज तक नहीं लिये गये हैं तो तुरन्त लिये जायें। यदि सम्बन्धित एजेन्सी किसी विशेषज्ञ एजेन्सी की सहायता लेना चाहते हैं तो केन्द्र सरकार ले सकती है और यमुना को सिल्ट, स्लज और गन्दगी से मुक्त रखना होगा। केन्द्र सरकार को इस सम्बन्ध में कदम उठाने होंगे और यमुना से सिल्ट, स्लज और गन्दगी को हटाने की कार्यवाही निरन्तर होनी चाहिए। न्यायालय ने यह भी निदेश दिया कि केन्द्र सरकार इस सम्बन्ध में शपथ पत्र प्रस्तुत करे और ऐसा शपथ पत्र उ0प्र0 राज्य सरकार व आगरा विकास प्राधिकरण द्वारा भी प्रस्तुत करने होंगे। तीनों संस्थाओं द्वारा प्रस्तुत किये जाने वाले शपथ पत्र में स्पष्ट रूप से उन्हें बताना होगा कि नियमित रूप से यमुना की सफाई करने की जिम्मेदारी किस संस्था की होगी।
न्यायालय ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह शपथ पत्र जून के अन्त तक दाखिल करने होंगे और उसके लिए कोई भी अतिरिक्त समय नहीं दिया जायेगा। अब यह मामला 11 जुलाई 2024 को न्यायालय द्वारा सुना जायेगा।
यमुना में पैदा हो रहे कीड़े ताजमहल का को रहे गंदा
अधिवक्ता जैन द्वारा सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि वर्ष 2015 से हर वर्ष यमुना में पैदा होने वाले कीड़े ताजमहल के मार्बल की दीवारों पर गन्दगी छोड़ते हैं। एडीएफ के द्वारा जो याचिका दाखिल की गयी थी उसमें यह मांग की गयी थी कि आगरा शहर की यमुना नदी से लगभग 5-6 मीटर गहराई तक जमा सिल्ट व गन्दगी को हटाया जाये और यमुना की तलहटी को उसकी पूर्व स्वाभाविक स्थिति में लाया जाये तथा यमुना की नियमित रूप से गन्दगी को हटाया जाये। यदि आवश्यक हो तो किसी विशेषज्ञ संस्था से ड्रेजिंग व डीसिल्टिंग का पर्यावरण तथा यमुना नदी के किनारे स्थित स्मारकों पर क्या प्रभाव पड़ेगा का अध्ययन करा लिया जाये। इस याचिका पर नोटिस पक्षकारों को 11 दिसम्बर 2019 को जारी किये गये थे और जल शक्ति मंत्रालय व उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अपना जवाब वर्ष 2020 में दाखिल किया जा चुका है।