आगरालीक्स…शुभ और मांगलिक कार्यों पर कल से सवा दो महीने तक रहेगी रोक। शुक्र तारा रहेगा अस्त। अक्षय तृतीया पर रहेगा अनबूझा मुहूर्त।
शुभ मुहूर्त बिना मांगलिक कार्य होते हैं निषेध

श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान एवं गुरु रत्न भंडार वाले ज्योतिषाचार्य पंडित हृदय रंजन शर्मा बताते हैं कि सनातन हिंदू धर्म के अनुसार कोई भी शुभ और मांगलिक कार्यों में शुभ मुहूर्त और शुभ ग्रहों का होना अत्यंत महत्वपूर्ण होता है क्योंकि जो हमारे पूर्वजों की परंपराएं चली आ रही हैं, जिसके अनुसार बगैर शुभ मुहूर्त के किसी भी शुभ कार्य का होना निषेध माना जाता है।
गुरु और शुक्र तारा उदित होना होता है जरूरी
ज्योतिष शास्त्र में विवाह शादी के लिए कुंडली मिलान और ग्रह नक्षत्र की सही स्थिति को देखा जाना और शुभ मुहूर्त में विवाह शादी करना अत्यंत शुभ माना गया है। विवाह के लिए गुरु और शुक्र तारा का आकाश में उदित होना अत्यंत जरूरी माना जाता है यदि यह है दोनों तारा ग्रह अस्त हो तो शुभ विवाह एवं मांगलिक कार्य निषेध माने जाते हैं।
मई और जून में शुभ विवाह मुहूर्त नहीं
हर साल मई और जून में शादियों के कई मुहूर्त होते हैं लेकिन इस वर्ष 2024 में गुरु और शुक्र तारा मई और जून में अस्त हैं, इसलिए मई और जून में एक भी शुभ विवाह मुहूर्त नहीं होगा।
चार माह का चातुर्मास लेकिन अनबूझे मुहूर्त में विवाह
इसके बाद चार माह का चातुर्मास भी प्रारंभ होने जा रहा है अतः केवल अनबूझे मुहूर्त में शादी विवाह करना उचित रहेगा क्योंकि वैसा कृष्ण पक्ष चतुर्थी रविवार 28 अप्रैल से आषाढ़ कृष्ण अमावस्या शुक्रवार 05 जुलाई तक शुक्र तारा अस्त हो रहा है, जिससे सवा दो महीने तक शुक्र तारा डूबा रहेगा। गुरु तारा वैशाख कृष्ण पक्ष चतुर्थी मंगलवार 7 मई से अस्त होगा जो की ज्येष्ठ कृष्ण पक्ष अष्टमी शुक्रवार तारीख 31 में को उदय होगा गुरु और शुक्र दोनों तारा जब दोनों अस्त होते हैं तो किसी भी प्रकार के शुभ मांगलिक कार्य पर रोक लग जाती है।
10 मई की है अक्षय तृतीया, 15 जुलाई की भड़ली नवमी
वैशाख शुक्ल तृतीया जिसे आखातीज अक्षय तृतीया कहते हैं 10 मई को है वह अनपूछा मुहूर्त होने से विवाह आदि कार्यों में किसी प्रकार का दोष नहीं माना जाएगा। इसी तरह 15 जुलाई को भड्ली नवमी भी अनपूछा मुहूर्त है इसमें भी शुभ विवाह आदि हो सकते हैं।
जुलाई माह में विवाह के सात शुभ मुहूर्त
09 जुलाई 2024 से 17 जुलाई तक विवाह मुहूर्त उपलब्ध होंगे इसमें 9 जुलाई 11, 12, 13, 14, 15 और 17 जुलाई शुभ विवाह मुहूर्त माने जाएंगे इसके बाद जाड़े में 17 नवंबर से ही विवाह आदि शुभ कार्य प्रारंभ हो सकेंगे।