आगरालीक्स ….आगरा में सराफा कारोबारी से जुडा बडा मामला सामने आया है, डीजीपी से शिकायत के बाद कारोबारी संग हुई लूट का खुलासा हुआ तो कारोबारी को जुए में फंसा दिया, कोर्ट ने कारोबारी को बरी कर दिया है।
बल्केश्वर के सीताराम कॉलोनी निवासी सर्राफ रिंकू बंसल से 21 जून 2015 को विजय नगर कॉलोनी में बदमाशों ने छह किग्रा सोना लूट लिया था। पहले पुलिस ने इसे फर्जी बताया, डीजीपी तक मामला पहुंचा और तीन महीने बाद लूट का खुलासा हुआ।
टहल रहे कारोबारी को जुए में दर्शाया
दीपावली पर 13 नवंबर 2015 को सर्राफ की कॉलोनी में जुआ फड़ पर दबिश दी। इसमें सर्राफ रिंकू बंसल समेत नौ लोगों को गिरफ्तार कर लिया। जुआ अधिनियम में उन्हें कोर्ट में पेश किया गया। जमानत पर रिहाई के बाद से ही वे खुद को बेगुनाह बता रहे थे। इसका सुबूत उन्हें सीसीटीवी कैमरे में मिल गया। घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे में पुलिस की दबिश से पहले वे पड़ोसी के साथ टहलते हुए दिख रहे थे। वे फड़ के पास नहीं थे। थानेदार से लेकर एसएसपी तक को उन्होंने पेन ड्राइव में कई बार सीसीटीवी की रिकार्डिग दी। किसी ने उनकी नहीं सुनी। वे अधिकारियों के दफ्तरों में चक्कर लगाते रहे। उधर पुलिस ने सर्राफ के खिलाफ कोर्ट में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया। इसके बाद पुलिस अधिकारियों की आस छोड़कर सर्राफ ने न्याय की लड़ाई न्यायालय में लड़ी।
इस तरह हुए दोषमुक्त
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मामले के विचारण के दौरान न्यायालय में विवेचक जेपी मौर्य पेश हुए। उन्होंने कोर्ट में गिरफ्तारी के दौरान बनाई गई फर्द में लिखी हुई बातें कहीं। मगर, बहस के दौरान हकीकत सामने आ गई। उनसे पूछा गया कि फड़ पर पत्ते कौन बांट रहा था? रिंकू बंसल की कौन सी जेब से कितने रुपये बरामद हुए? इनमें से एक भी सवाल का वे जवाब नहीं दे सके। वे यह भी नहीं बता सके कि फड़ से बरामद हुए 56900 रुपये में से किसके पास कितने रुपये मिले थे? अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर सर्राफ रिंक बंसल को बरी करने के आदेश दे दिए। सर्राफ का कहना है कि पुलिस ने उन्हें जुआ में फंसाकर बदनाम किया था। इस दाग को हटाने के लिए उन्होंने सभी अधिकारियों के चक्कर लगाए, लेकिन वहां से राहत नहीं मिली।
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