वृंदावनलीक्स…Vrindavan News : ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्योत्सव है, निधिवन में प्राकट्य के बाद चांदी के रथ के साथ शोभायात्रा के साथ निकले। जानें इतिहास। ( Vrindavan News : Birth anniversary of Thakur Banke Bihari Jee celebrate in Nidhivan, Knkw History#Vrindavan)
शुक्रवार सुबह पांच बजे निधिवन में ठाकुर बांकेबिहारी का दुग्धाभिषेक किया शुरू हुआ, इसके साथ ही बांकेबिहारी लाल के जयकारे गूंजने लगे। पांच कुंतल दूध, दही, घरी, बूरा, जड़ी बूटियों के सााि ही शर्करा से महाभिषेक किया गया। इस दौरान गायन चलता रहा, महाभिषेक के बाद आरती उतारी गई।
चांदी के रथ में विराजमान होकर निकले स्वामी हरिदास
शिरोमणि स्वामी हरिदास महाराज चांदी के रथ में विराजमान होकर ठाकुर बांकेबिहारी जी को प्राकट्योत्सव की बधाई देने के लिए शोभायात्रा के साथ बांकेबिहारी मंदिर के लिए निकले। शोभायात्रा में बैंड बाजे, झांकियों के साथ ही महिलाएं 56 तरह मकान की मटकियां सिर पर लेकर चल रहीं थी। हर तरफ बांकेबिहारी के जयकारे गूंज रहे हैं।
निधिवन में इस तरह हुआ ठाकुर बांकेबिहारी का प्राकट्य
वृंदावन स्थित निधिवनराज मंदिर में संगीत शिरोमणि स्वामी हरिदास महाराज संगीता साधना और श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहते थे। कान्हा की भक्ति में संगीत साधना करते हूए डूब जाते थे। उन्होंने अपने लाड़के ठाकुर बांकेबिहारी का संगीत साधना के माध्यम से मार्गशीर्ष की शुक्ल पक्ष की पंचमी को प्राकट्य किया था। इसे विहारी पंचमी के नाम से जाना जाता है हर वर्ष नवंबर महीने में मार्गशीर्ष शुक्ल पक्ष की पंचमी को निधिवन में ठाकुर बांकेबिहारी जी का प्राकट्य मनाया जाता है।