आगररलीक्स…. आगरा में टेस्ट टयूब बेबी के कोम्पलीकेशन को अब एम्ब्रियोस्कोप से दूर किया जा सकेगा। एम्ब्रियोस्कोप से हम कई भ्रूणों में से ऐसे भ्रूण का चुनाव कर सकते हैं, जो स्वस्थ और तन्दरुस्त शिशु (वंशानुगत बीमारियों रहित) की किरकारी से आंगन को महंकाएगा। यह जानकारी डॉ. जयदीप मल्होत्रा ने होटल रेडिसन ब्लू में एओजीएस द्वारा आयोजित साइंटिफिक इवेंट में दी।
बताया कि लगातार बढ़ रही इनफर्टीलिटी की समस्या के कारण आईवीएफ ट्रीटमेंट लेने वाले दम्पतियों की संख्या में भी इजाफा हो रहा है। इस विषय को लेकर जानकारी के अभाव में कई भ्रांतियां हैं। मसलन आईवीएफ तकनीक की वजह से कोम्पलीकेशन होते हैं। जबकि ऐसा नहीं। हां इस तकनीक से बच्चे का सुख प्राप्त करने के लिए कुछ अतिरिक्त देखभाल की जरूरत होती है, जिससे कोम्पलीकेशन न हों। कोम्पलीकेशन का कारण अधिक उम्र में गर्भधारण करना, तनाव व उम्र के साथ होने वाली बीमारियां (बीपी, डायबिटीज) हो सकती हैं। लेकिन आज उनसे बचने के कई तरीके हैं। सबसे पहले अब हम एम्ब्रियोस्कोप के जरिए हम बेस्ट भ्रूण (जिसमें वंशानुगत बीमारियों की भी सम्भावना भी न हो) का चुनाव कर सकते हैं।
डॉ. केशव मल्होत्रा ने प्री इम्प्लांटेशन जैनेटिक स्क्रीनिंग (पीजीएस) पर प्रिजेन्टेशन के दौरान बताया कि यदि 40 के बाद आप आईवीएफ का लाभ ले रहे हैं तो 6 भ्रूण में से 4 भ्रूण तक एबनोर्मल हो सकते हैं। पीजीएस व पीजीडी तकनीक से भ्रूण की एक कोशिका लेकर पता लगाया जा सकता है कि वह स्वस्थ है या नहीं। भारत में अब इस तकनीक को शुरू किया जा चुका है। यानि आईवीएफ तकनीक वाले सिशुओं में जैनेटिक डिसआर्डर को लगभग खत्म किया जा सकता है।
मुम्बई की डॉ. मंजीत मेहता ने गर्भावस्ता के दूसरे माह में होने वाली जांच एनआईपीटी (मां के रक्त से) के बारे में बताया। अतिथियों का स्वागत डॉ. नरेन्द्र मल्होत्रा ने किया। डॉ. आरएन गोयल को इस मौके पर आईएसपीएटी का यूपी का प्रसीडेंट घोषित किया गया।
थॉयरायड की समस्या शिशु को कर सकती है मानसिक रूप से कमजोर
डॉ. सौरभ दानी व डॉ. राकेश भाटिया ने न्यूबोर्न स्क्रीनिंग के बारे में बताते हुए कहा कि बच्चें में थॉयरायड की समस्या उसे मानसिक रूप से कमजोर कर सकती है। यदि शिसु में थॉयरायड की समस्या है तो उसका आईक्यू हर हफ्ते 10 प्वाइंट की दर से कमजोर हो सकती है। जिन माता पिता में हिस्ट्री है उनके इसके लिए शिशु के जन्म के 24 घंटे में अवस्य जांच करानी चाहिए।
ये रहे उपस्थित
आगरा ओब्सटेक्ट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजीकल सोसायटी की अध्यक्ष डॉ. सुधा बंसल, सचिव डॉ. वंदना सिंघल, एसएन मेडिकल कॉलेज की प्राचार्य डॉ. सरोज सिंह, डॉ. अनुपम गुप्ता, डॉ. अलका सारस्वत, डॉ. रजनी पचौरी, डॉ. सुधा प्रसाद, डॉ. सुषमा गुप्ता, डॉ. रिचा सिंह, डॉ. दीक्षा गोस्वामी, डॉ. आरती शर्मा आदि उपस्तित थीं।