आगरालीक्स…आगरा के हिन्दुस्तान काॅलेज में ‘‘मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य’’ पर हुआ विशेष व्याख्यान. कहा—नजरअंदाज न करें मानसिक स्वास्थ्य
आज के युग में शिक्षा, प्रतिस्पर्धा और भविष्य की चिंताओं के कारण विद्यार्थियों में मानसिक दबाव का स्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसी विषय पर हिन्दुस्तान काॅलेज आफ साइंस एण्ड टेक्नोलाॅजी के सभागार में ‘‘मनोविज्ञान और मानसिक स्वास्थ्य’’ विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता एचआईएमसीएस के निदेषक डाॅ. नवीन गुप्ता रहे। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व, अवसाद के कारणों और आत्महत्या की रोकथाम के उपायों पर विस्तार से चर्चा की। कार्यक्रम के प्रारम्भ में हिन्दुस्तान काॅलेज के निदेषक डाॅ. आर.एस.पवित्र ने इस व्याख्यान की रूपरेखा के बारे में विस्तार से बाताया। उन्होंने इस व्याख्यान के लाभ बताये।डाॅ. गुप्ता ने बताया कि जैसे हम अपने शारीरिक स्वास्थ्य की नियमित जांच करवाते हैं, वैसे ही मानसिक स्वास्थ्य की जांच और देखभाल भी आवश्यक है। लेकिन अधिकांश लोग अपने मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज कर देते हैं, जिसके परिणामस्वरूप तनाव, अवसाद और कई बार आत्महत्या जैसी गंभीर घटनाएं सामने आती हैं। वक्ता ने कहा कि वर्तमान समय में छात्रों में आत्महत्या की प्रवृत्ति चिंताजनक स्तर तक पहुँच चुकी है और इसका मुख्य कारण मानसिक दबाव और अवसाद है।
उन्होंने न्यूरोटिक और साइकोटिक अवस्थाओं के बीच का अंतर स्पष्ट किया। न्यूरोटिक अवस्था में व्यक्ति को चिंता, तनाव, भय और चिड़चिड़ापन महसूस होता है, लेकिन वह वास्तविकता से जुड़ा रहता है। वहीं साइकोटिक अवस्था में व्यक्ति वास्तविकता से कट जाता है और उसकी सोचने-समझने की क्षमता गंभीर रूप से प्रभावित हो जाती है। दोनों स्थितियों में समय रहते पहचान और उपचार बेहद जरूरी है। व्याख्यान के दौरान अवसाद की पहचान के लिए कई परीक्षणों की जानकारी दी गई। इनमें ‘‘थ्री फिंगर टेस्ट’’ का विशेष उल्लेख किया गया, जिसमें व्यक्ति के शारीरिक और मानसिक समन्वय की जांच की जाती है। इसके अलावा, स्मृति परीक्षण, भावनात्मक प्रतिक्रिया परीक्षण, और व्यक्तित्व मूल्यांकन जैसे विभिन्न मनोवैज्ञानिक परीक्षणों की भी चर्चा हुई।सत्र के दौरान षिक्षकों को एक संक्षिप्त मनोवैज्ञानिक अवसाद परीक्षण भी दिया गया, जिसके माध्यम से वे अपने और अपने छात्रों की मानसिक स्वास्थ्य की स्थिति को समझ सकें। डाॅ. गुप्ता ने बताया कि अवसाद केवल नकारात्मक सोच या उदासी नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है जिसमें समय पर सहायता आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि मानसिक स्वास्थ्य की देखभाल के लिए नियमित रूप से ध्यान, योग, प्राणायाम और सकारात्मक सोच को अपनाना चाहिए। साथ ही, सामाजिक संपर्क बनाए रखना, अपनी समस्याओं को साझा करना और आवश्यक होने पर पेशेवर सलाह लेना बेहद जरूरी है।
इस कार्यक्रम के समन्वयक मकैनिकल विभाग के विभागाध्यक्ष डाॅ. कपिल गुप्ता रहे। कार्यक्रम का संचालन मैनेजमेंट विभाग की षिक्षिका श्रीमती तनु मारवा रहीं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में डाॅ. रिजू अग्रवाल का विषेष योगदान रहा।
इस अवसर पर संस्थान के समस्त विभागाध्यक्ष, षिक्षकगण एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।