आगरालीक्स…आगरा में पकड़ी गई करोड़ों की नकली दवा मामले में एक और एफआईआर. कूरियर कंपनी संचालक सहित छह आरोपी इस काले कारोबार में शामिल. सभी को किया नामजद
आगरा में करोड़ों रुपये की नकली दवाओं के काले कारोबार में एक और एफआईआर दर्ज की गई है. इस एफआईआर में कूरियर कंपनी के संचालक सहित छह को नामजद किया गया है. ये सभी भी इस काले कारोबार में शामिल थे और नकली दवाओं की सप्लाई को बड़ी चालाकी से अंजाम दे रहे थे. सहायक आयुक्त औषधि एवं खाद्य सुरक्षा की ओर से थाना कोतवाली में यह मुकदमा दर्ज कराया गया है. इस मुकदमे में एमएस कार्गो कूरियर कंपनी का संचालक यूनिस और उसके साथी वारिस, विक्की, सुभाष कुमार, हिमांशु और फरहान को नामजद किया गया है. इन लोगों के माध्यमसे ही आगरा कैंट स्टेशन पर आने वाली नकली दवाओं को कोतवाली की बंसल और हे मां मेडिकल एजेंसी पर लाया जाता था.हींग की मंडी से पकड़ा था दवाओं से लदा आटो
आगरा में एसटीएफ और ड्रग डिपार्टमेंट ने शुक्रवार को फव्वारा बाजार स्थित बंसल मेडिकल और हे मां मेडिको पर छापा मारा था, रात में दुकान और दोनों के गोदाम सील कर दिए थे. इसी दौरान टीम को 87 लाख रुपये की एंटी एलर्जिक दवाएं भी फव्वारा दवा बाजार में आटो में मिली थी जिन्हें बंसल मेडिकल पर उतारा जाना था. टीम को सूचना मिली थी कि एक आटो दवाओं से लदा आ रहा है. इस पर पाकीजा होटल के सामने से होते हुए टीम हींग की मंडी आई जहां दवाओं से लदे टैम्पो को रोका गया. टैम्पो चालक ने अपना नाम आरि मलिक पुत्र शमशाद निवासी सैंया बताया. उसने कहा कि उसके माकि यूनिस, जॉनी व वारिा पुत्रगण खलील निवासी सुल्तानपुरा आगरा कैंट है जो कि रेलवे से आने वाले सामान की ढुलाई का काम करते हैं. आज यूनिस और वारिस ने उसे यहकहा कि जो 12 प्लास्टिक के बोरे है ये चैन्नई से आने वाली गाड़ी से आए हैं.फरहान से पूछतकार उसके कहे अनुसार पहुंच देना. फरहान से जब उसने बात की तो उसने बताया कि इन बंद 12 बोरों में दवाई और सभी बोरों को हे मां मेडिकल के मालिक हिमांशु अग्रवाल के यहां पहंचा देना. रास्ते में कोई पूछे तो बता देना लैदर है.
टीम ने जब फरहान के बादे में पता किया तो वह पथौली का रहने वाला है. आटो चालक ने बताया कि फरहान और वारिस उसके पीछे स्कूटी से आ रहे थे लेकिन टीम को देखकर स्कूटी से भाग गए. टैम्पो चालक से जब इन बोरों के कागजात मांगे तो उसने चार चालान दिखाए जिस पर एमएस लोजिस्टिक्स आगरा लिखा था. लेकिन ये दवाइयों के नहीं हैं. इसके अलावा दो टैक्स इनवोइस भी मिले जो कि मीनाक्षी फार्मा, धनकोढ़ी नगर, धर्मपुरी और न्यू बाबा फार्मा अवध कॉम्प्लैक्स अमीनाबाद लखनफ तािा पार्वती ट्रेडर्स आशियाना लखनऊ को जारी की गई है. मीनाक्षी फार्मा द्वारा लखनऊ के न्यू बाबा फार्मा और पार्वती ट्रेडर्स को 3 हजार एलेग्रा 120 एमजी के पत्ते विक्रमय किया गया था. दोनेां इनवोइस की कीमत 10 लाख से अधिक की थी. इसे अलावा 29720 अन्य पत्ते निजकी कीमत 78 लाख 67 हजार से अधिक थी इन्हें बंसल मेडिकल पर उतारा जाना था. टैम्पो चालक से जब बिलों के बारे में पूछताछ की तो उसने कहा अनभिज्ञता जताई और कहा कि सुबह इस बारे में पूरी जानकारी अपने मालिकों के यहां से दिलवा देगा. इस पर टीम ने उसे जाने दिया. अगले दिन सुबह जब टैम्पो चालक आया तो उसने कहा कि मालिक घर पर नहीं है और घर में ताले लगे हैं. सभी के मोबाइल भी बंद आ रहे हैं. तभी इन दवाओं के नकली होने का शक हुआ.
कारोबारी ने दी एक करोड़ की रिश्वत की पेशकश
शनिवार को टीम ने पहले हे मां मेडिको के मोती कटरा गोदाम पर कार्रवाई की. कार्रवाई के दौरान संचालक हिमांशु अग्रवाल ने एक करोड़ रुपये देकर नकली दवा गोदाम से हटाने की पेशकश की. सहायक औषधि आयुक्त नरेश मोहन दीपक ने बताया कि एसटीएफ इंस्पेक्टर यतींद्र शर्मा ने अधिकारियों से बात की इसके बाद प्लानिंग कर हिमांशु अग्रवाल को एक करोड़ रुपये की रिश्वत के साथ पकड़ लिया गया.
जांच में हिमांशु अग्रवाल से पूछताछ के बाद पता चला है कि दक्षिण के दवा माफियाओं के साथ मिलकर नकली दवाएं तैयार कर बाजार में बेची जा रहीं थी। करोड़ों की दवाएं मंगाई जाती थी इन्हें उत्तर प्रदेश के कई शहरों के साथ ही कई राज्यों में बेचा जाता था।
करोड़ों की दवाएं गोदाम और दुकानों में भरी
एसटीएफ ने 3.50 करोड़ की नकली दवाएं जब्त कर ली हैं। गोदाम और दुकानों में करोड़ों की दवाएं भरी हुई हैं।
ऐसे खुला नकली दवा का खेल
पिछले कुछ सालों से एंटी एलर्जिक और एंटीबायोटिक दवाओं की बिक्री कई गुना बढ़ गई है इसके बाद भी दवा कंपनियों की सेल नहीं बढ़ रही थी। कंपनियों ने अपने स्तर से जांच कराई, इसमें नकली दवा तैयार करने की जानकारी हुई। इसकी शिकायत औषधि विभाग के मुख्यालय में की गई। मुख्यालय से औषधि विभाग और एसटीएफ की टीमें गठित की गईं। इन टीमों ने 20 दिन तक जांच की, इसके बाद छापेमार कार्रवाई की, इसमें नकली दवा पकड़ी गई हैं।
29 हजार स्ट्रिप पर एक जैसा बार कोड
सेनोफी कंपनी के जीएम विवेक गौड़ ने बताया कि उनकी कंपनी द्वारा एंटी एलर्जिक ऐलेग्रा टैबलेट बनाई जाती है। 10 टैबलेट की एक स्ट्रिप होती है और हर स्ट्रिक पर अलग क्यूआर कोड का ब्योरा होता है। औषधि विभाग द्वारा 29 हजार से अधिक स्ट्रिप पकड़ी गई हैं, इन स्ट्रिप के जब क्यू आर कोड स्कैन किए गए तो सभी पर एक जैसा ब्योरा मिला है।