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Agra News : GERD, Causes, Symptoms, and Effective Treatments You Should Know…#Agra

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आगरालीक्स…गैस, अपच और खट्टी डकार से परेशान हैं तो ये खबर आपके काम की है, पेट के वरिष्ठ डॉक्टरों से जानें कि क्या है जीईआरडी, कौन लोग हो रहे इसके शिकार और कैसे करना है बचाव

गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी), आम लोगों को यह शब्द सुनने—पढ़ने में भले ही अनजाने लगें, लेकिन शायद ही कोई हो जिसका इससे पाला न पड़ा हो। पेट में गैस, सीने में जलन, खट्टी डकार की समस्या लगातार बने रहने को डॉक्टरों की भाषा में जीईआरडी कहते हैं और यह जीईआरडी अवेयरनैस वीक है।

इंटरनेशनल फाउंडेशन फॉर गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल डिसऑर्डर्स (आईआईएफजीडी) के आह्वान पर भारत में 23 से 29 नवंबर 2025 तक जीईआरडी अवेयरनेस वीक मनाया जाएगा। यहां इसकी चर्चा इसलिए भी जरूरी है क्योंकि खराब जीवनशैली, शराब के अधिक सेवन आदि कारणों से पिछले कुछ समय में आगरा में जीईआरडी या इसके लक्षणों वाले मरीजों की संख्या काफी बढ़ी है। हालांकि राहत की बात है कि आगरा में गैस्ट्रो का एक स्पेशलाइज्ड सेंटर है। पिछले तीन सालों से आगरा में सेंट जॉन्स कॉलेज के नजदीक पुराने रघुनाथ सिनेमा में स्थापित आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर मरीजों को राहत पहुंचा रहा है।

जीईआरडी क्या है ?
आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. समीर तनेजा बताते हैं कि गैस्ट्रोएसोफेगल रिफ्लक्स रोग (जीईआरडी) एक ऐसी पाचन संबंधी स्थिति है जिसमें पेट की सामग्री (एसिड सहित) भोजन नली में वापस आ जाती है। इसकी वजह से अक्सर सीने में जलन, खट्टा या कड़वा स्वाद, पेट में भारीपन या उल्टी जैसे लक्षणों का सामना करना पड़ता है। जीईआरडी के उपचार में जीवनशैली में बदलाव, दवाएं और गंभीर मामलों में सर्जरी शामिल है।

क्यों होती है ?
आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. दिनेश गर्ग ने बताया कि हमारे शरीर में पेट और खाने की नली के बीच एक वॉल्व होता है जो एसिड और खाने को वापस आने से रोकता है। जब यह वॉल्व कमजोर हो जाए तो खाना वापस आने लगता है और खाने की न ली में एसिड, म्यूकोसा या इंटरनल लाइनिंग जल जाती है। इससे बहुत से लोगों को खट्टा पानी आने या जलन जैसी शिकायतें हो जाती हैं। बहुत लंबे समय तक रहने से समस्याएं और बढ़ती जाती हैं।

कौन लोग होते हैं शिकार ?
आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ.​ विनीत चौहान ने बताया कि खराब जीवनशैली वाले लोग, ऐसे लोग जो खाने—पीने पर नियंत्रण नहीं रख पाते और उनका वजन बढ़ता जाता है, एल्कोहल और स्मोंकिंग करने वाले, बहुत स्पाइसी खाने वाले, ओवर ईटिंग करने वाले, सिटिंग जॉब वाले इसकी चपेट में जल्दी आते हैं। बहुत लंबे समय तक रहने पर खाने—पीने में दिक्कतें, खाना अटकना, पानी निगलने में परेशानी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। यह लक्षण नजर आने पर जांचें की जाती हैं। एंडोस्कोपी, पीएच मॉनी​टरिंग, इसोफेगस में प्रेशर मॉनीटरिंग से भी पता लगाया जाता है। प्राथमिक उपचार में केवल जीवनशैली बदलने से ही काफी राहत मिल सकती है। यदि नहीं मिलती है तो दवाओं से इलाज किया जाता है। सर्जरी सबसे अंतिम विकल्प होता है, लेकिन सर्जरी के बाद भी कई मामलों में लंबे समय से चली आ रही दिक्कतें तक दूर हो जाती हैं।

कैसे करें बचाव ?
आगरा गैस्ट्रो लिवर सेंटर के सीनियर गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. पंकज कौशिक ने बताया कि जीईआरडी को नियंत्रित करने के लिए सबसे पहला प्रयास जीवनशैली में सुधार का ही करें। इससे राहत न मिलने पर दवाओं की ओर जाना चाहिए। सबसे पहले अगर वजन ज्यादा है तो उसे कम करने के लिए खानपान पर नियंत्रण और नियकित व्यायाम करें। शरीर को गतिशील बनाएं। एल्कोहल, धूम्रपान, अधिक मसालेदार, तेलीय खाना एकदम बंद कद रें। एक बार में अधिक खाने की जगह दिन में कई बार और थोड़ी—थोड़ी मात्रा में खाएं। खाने और सोने के बीच कम से कम दो घंटे का अंतर रखें। सुबह का नाश्ता ठीक करें जबकि लंच और डिनर में कमी लाएं। सोते वक्त कोशिश करें कि आपका सिर हल्की उंचाई पर रहे। सोने से एकदम पहले पानी, दूध या कोई अन्य तरल पदार्थ न लें। लेफ्ट साइड डाउन सोने की कोशिश करें।

लक्षण
सीने में या गले में जलन
मुँह में खट्टा या कड़वा स्वाद
पेट के ऊपरी हिस्से में दर्द
बार-बार डकार आना
पेट में भारीपन या गैस
गले में खराश या खांसी, खासकर सुबह में
उल्टी जैसा महसूस होना

कारण
पेट के एसिड का खाने की नली में वापस आना
खाने की नली और पेट के बीच के वाल्व, जिसे निचला एसोफेजियल स्फिंक्टर कहते हैं, का ठीक से बंद न होना
कुछ खाद्य पदार्थ और पेय
मोटापा और गर्भावस्था
कुछ दवाएं, जैसे अस्थमा की कुछ दवाएं

Written by
Agraleaks Team

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