मथुरालीक्स…डबडबाती आंखें लिए यमुना मैया के हाथ जोड़कर खड़ा एक परिवार. आस में बैठै वृद्ध माता पिता, पत्नी और बच्चे…यमुना में डूबे पंकज की तलाश में लगी हैं 39 टीमें…मोटर बोट हादसे में अब तक 15 शव मिले
वृंदावन मोटर बोट हादसे ने कई परिवारों को जिंदगी भर का गम दिया है. शुक्रवार 10 अप्रैल को पंजाब से वृंदावन मंदिरों के दर्शन करने आये एक दल ने निधिवन में दर्शन किए और इसके बाद मोटर बोट से यमुना भ्रमण पर निकले. लेकिन 38 श्रद्धालुओं से भरी एक मोटर बोट केशी घाट पर पीपा पुल से टकरा गई और नाव पर सवार सभी लोग डूब गए. 22 श्रद्धालुओं को गोताखोरों की मदद से बचा लिया गया लेकिन 16 श्रद्धालु नदी में डूब गए. रेस्क्यू आपरेशन में सेना के साथ एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की टीमें भी जुट गईं लेकिन शुक्रवार को 10 श्रद्धालुओं की लाश नदी से निकाली गईं. शनिवार को दो और रविवार को दो श्रद्धालुओं के शव मिल गए. सोमवार तक 15 श्रद्धालुओं के शव निकाले गए.100 घंटे से पंकज की तलाश
15 श्रद्धालुओं के शव मिलने के बाद आखिरी श्रद्धालु पंकज की तलाश यमुना में की जा रही है. 100 घंटे बीतने के बाद भी पंकज का पता यमुना में नहीं चल पाया है. इसके लिए केशीघाट से 39 टीमें मोटर बोट से उनकी खोजबीन करने में जुटी हुई हैं, लेकिन अभी तक पंकज का पता नहीं चल पाया है. अब सर्चिंग का दायरा दो किमी और अधिक बढ़ा दिया गया है.
पंकज की तलाश में उनका परिवार डबडबाई आंखोंं के लिए यमुना किनारे बैठा हुआ है. वृद्ध माता पिता यमुना किनारे टकटकी लगा रहे हैं. पत्नी और बच्चे भी यहां आस में हैं. सर्चिंग करके लौटने वाली हर मोटर बोट से वे पंकज का अपडेट ले रहे हैं लेकिन अभी तक उनका कुछ पता नहीं चल पाया है. पंकज हिमाचल में एक स्टील कंपनी में मैनेजर के पद पर तैनात हैं. वह दो बहनों में अकेले हैं.
इन 15 श्रद्धालुओं के मिल चुके हैं शव
पिंकी बहल—चरनजीत सिंह (पति पत्नी), कविता रानी—मधुर बहल (मां—बेटे), ईशान कटेरिया, सपना हंस, आशा रानी, मीनू बंसल, अंजु गुलाटी—रिंकेश गुलाटी (पति पत्नी), माणि टंडन, डिंगी बसंल, रिषभ, मोनिका, यश