आगरालीक्स…2 मई से शुरू हो रहा ज्येष्ठ माह इस बार दो महीने 29 जून तक चलेगा. बीच में एक महीने का होगा अधिकमास..जानिए कब से शुरू होगा अधिकमास और क्या है इसका महत्व
हिन्दू कैलेंडर में ज्येष्ठ का महीना तीसरा महीना होता है, ज्येष्ठ का महीना वैशाख के महीने के बाद आता है. अंग्रेजी कैलेंडर की बात करें तो ये महीना हमेशा मई व जून के महीने में ही आता है. इस वर्ष ज्येष्ठ मास का महीना अधिक मास के रूप में होगा अतः 2 मई से लेकर 29 जून तक ज्येष्ठ का महीना रहेगा इस महीने में सूर्य अत्यंत ताक़तवर होते हैं, इसलिए गर्मी भी ज्यादा होती है. सूर्य की ज्येष्ठता के कारण इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है. ज्येष्ठा नक्षत्र के कारण भी इस माह को ज्येष्ठ कहा जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन ही चंद्रमा ज्येष्ठा नक्षत्र में होता है, इसलिए इस महीने को ज्येष्ठ नाम दिया गया है.इस महीने में धर्म का सम्बन्ध जल से जोड़ा गया है, ताकि जल का संरक्षण किया जा सके, इस मास में सूर्य और वरुण देव की उपासना विशेष फलदायी होती है।यह माह बेहद गर्म होता है। इस दौरान उत्तर भारत लू (गर्म हवाएं) की चपेट में आ जाता है। ज्येष्ठ के महीने में सूर्यदेव अपने रौद्र रूप में रहते हैं जिसके कारण प्रचंड गर्मी रहती है। इसलिए ज्येष्ठ के महीने में पानी पिलाने और दान करने का विशेष महत्व होता है।इस बार ज्येष्ठ मास 02 मई 2026 से शुरू होकर 29 जून 2026 तक रहेगा। तत्पश्चात आषाढ मास प्रारंभ हो जाएगा। इस दौरान 17 मई से 15 जून तक अधिकमास रहेगा।
ज्येष्ठ मास का वैज्ञानिक महत्व क्या है?ज्येष्ठ महीने में जल का महत्व
ज्येष्ठ माह में पानी का वाष्पीकरण तेजी से होता है जिसके कारण से नदियां और तालाब सूख जाते हैं। हिन्दू सभ्यता में इस महीने जल के संरक्षण का विशेष जोर दिया जाता है। ज्येष्ठ महीने में गंगा दशहरा और निर्जला एकादशी जैसे व्रत भी रखे जाते हैं। ये व्रत प्रकृति में जल को बचाने का संदेश देते हैं। गंगा दशहरा में नदियों की पूजा और निर्जला एकादशी में बिना जल का व्रत रखा जाता है।
- इस माह में वातावरण और शरीर में जल का स्तर गिरने लगता है।
- अतः जल का सही और पर्याप्त प्रयोग करना चाहिए।
- सन स्ट्रोक और खान पान की बीमारियों से बचाव आवश्यक है।
- इस माह में हरी सब्जियां, सत्तू, जल वाले फलों का प्रयोग लाभदायक होता है।
- इस महीने में दोपहर का विश्राम करना भी लाभदायक होता है।
ज्येष्ठ के मंगलवार की क्या महिमा है?
ऐसा माना जाता है कि ज्येष्ठ मास में ही प्रभु श्रीराम व हनुमान जी की मुलाकात हुई थी। जिस कारण ज्येष्ठ मास में मंगलवार को हनुमान जी की पूजा अति लाभदायक मानी जाती है।
ज्येष्ठ के मंगलवार को हनुमान जी की विशेष पूजा की जाती है।
इस दिन हनुमान जी को तुलसी दल की माला अर्पित की जाती है।
साथ ही हलवा पूरी या मीठी चीज़ों का भोग भी लगाया जाता है।
इसके बाद उनकी स्तुति करें।
निर्धनों में हलवा पूरी और जल का वितरण करें।
ऐसा करने से मंगल सम्बन्धी हर समस्या का निदान हो जाएगा।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य परम पूज्य गुरुदेव पंडित हृदय रंजन शर्मा अध्यक्ष श्री गुरु ज्योतिष शोध संस्थान गुरु रत्न भण्डार वाले पुरानी कोतवाली सर्राफा बाजार अलीगढ़ यूपी वाट्सएप नंबर.975640298,7500048250