आगरालीक्स…अधिकमास के आखिरी दिन 15 जून को सोमवती अमावस्या. 3 शुभ योगों के साथ मनाई जाएगी साल की पहली सोमवती अमावस्या. स्नान-दान, विष्णु जी की पूजा, पितरों के तर्पण और श्राद्ध के लिए बहुत खास मानी जाती है
सनातन धर्म में अमावस्या तिथि पवित्र मानी गई है, विशेषकर पितृ तर्पण और दान के लिए। 2026 में ज्येष्ठ अधिकमास की सोमवती अमावस्या अत्यंत शुभ है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की साल 2026 के जून माह में 15 तारीख को ज्येष्ठ अधिकमास की अमावस्या है। पंचांग के अनुसार, इस बार सोमवती अमावस्या अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है। अमावस्या तिथि की शुरुआत 14 जून, रविवार को दोपहर 12:20 बजे से होगी और इसका समापन 15 जून, सोमवार को सुबह 8:24 बजे होगा। उदया तिथि को ध्यान में रखते हुए 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का व्रत रखा जाएगा और स्नान-दान किया जाएगा, जबकि पितृ कार्यों के लिए 14 जून का दिन अधिक उपयुक्त माना गया है।चूंकि इस दिन सोमवार है, इसलिए इसको सोमवती अमावस्या कहा जा रहा है। सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान का शुभ समय: ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4 बजकर 04 मिनट से सुबह 4 बजकर 44 मिनट तक है। कुल समय स्नान-दान मुहूर्त - सुबह 7:07 - दोपहर 12:21 तक।
सोमवती अमावस्या 2026 शुभ योगों का समय -
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार इस दिन वृद्धि योग योग स्नान और दान कर्म के लिए अत्यंत शुभ माना गया है. साथ ही स्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग भी खास है. सोमवती अमावस्या के दिन वृद्धि योग सूर्योदय से लेकर 16 जून को देर रात 12 बजकर 35 मिनट तक रहेगा. सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 5 बजकर 54 मिनट से शाम 07 बजकर 08 मिनट तक रहेगा. अमृत सिद्धि योग सुबह 05 बजकर 54 मिनट से शाम 07 बजकर 08 मिनट तक रहेगा.
ये अधिकमास की अमावस्या होगी इसलिए इसका खास महत्व है, क्योंकि ये तिथि 3 साल बाद आई है। भविष्योत्तर पुराण में सोमवती अमावस्या व्रत को स्त्रियों के लिए विशेष फलदायी बताया गया है। इस दिन विवाहित महिलाएं पति की दीर्घायु और अखंड सौभाग्य की कामना से व्रत और पीपल पूजन करती हैं।
पितरों के लिए ज्येष्ठ अधिक अमावस्या पर करें ये उपाय -
ज्योतिषाचार्य हृदय रंजन शर्मा जी हिंदू मान्यता के अनुसार अमावस्या अधिक मास की अमावस्या पर प्रात:काल किसी पवित्र जल तीर्थ पर जाकर स्नान करना चाहिए. इसके बाद पवित्र जल में तिल और पुष्प डालकर पितरों के लिए तर्पण करना चाहिए. मान्यता है कि अमावस्या के दिन पितृ गायत्री मंत्र - ॐ पितृभ्य: स्वधायिभ्यो नम: का जप करने पर पितर प्रसन्न होकर अपनी कृपा बरसाते हैं. हिंदू मान्यता के अनुसार अमावस्या तिथि पर यदि कोई श्रीमद्भगवद्गीता का सातवां पाठ पितरों के लिए अर्पित करता है उससे पितर तृप्त होकर अपनी कृपा बरसाते हैं.
सोमवती अमावस्या का धार्मिक महत्व -
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार सोमवती अमावस्या के दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा विशेष रूप से की जाती है. सोमवती अमावस्या के दिन स्नान, दान, जप, तप और पूजा-पाठ का विशेष फल प्राप्त होता है। मान्यताओं के अनुसार, अगर पति-पत्नी साथ में सोमवती अमावस्या के दिन महादेव और माता पार्वती की पूजा करते हैं, तो वैवाहिक जीवन की सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं. इसके अलावा, पितरों की शांति के लिए किए गए तर्पण और दान-पुण्य से प्रसन्न होकर पितृ वंश वृद्धि और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देते हैं.
सुबह सूर्योदय से पहले उठकर स्नान करें. संभव हो तो पवित्र नदी (जैसे गंगा) में स्नान करें. शिव मंदिर जाकर भगवान शिव और माता पार्वती का पूजन करें. जल और कच्चे दूध से अभिषेक करें. बेलपत्र, अक्षत और तिलक अर्पित करें. शिव आरती करें और मंत्र जाप करें. पीपल के वृक्ष की पूजा और परिक्रमा करें. पितरों के लिए तर्पण और श्राद्ध करें।
क्या दान करें
अमावस्या पर दान का विशेष महत्व होता है. इस दिन किया गया दान कई गुना फल देता है. इस दिन चावल, आटा, दाल, नमक, फल और सब्जियां, सफेद वस्तुएं (दूध, चीनी आदि) आदि चीजों का दान जरूर करें.
किन लोगों के लिए है खास
जिनका जन्म अमावस्या पर हुआ है.
जिनकी कुंडली में चंद्रमा कमजोर या अस्त है.
जिनके चंद्रमा 6वें, 8वें या 12वें भाव में हैं.
ऐसे लोगों को इस दिन विशेष रूप से शिव-पार्वती पूजा और सफेद वस्तुओं का दान करना चाहिए. इससे मानसिक तनाव, अशांति और जीवन की परेशानियों में राहत मिलती है.