आगरालीक्स…’दुकानदारों की ऐसी जुगाड़, उधार मांगने वाले हो जाएं शर्मसार…’, उधार से बचने के लिए आजकल कारोबारी बड़े मनोरंजक पोस्टर लगा रहे हैं, कहीं मजाकिया तो कहीं भावुक संदेश, ऑनलाइन—ऑफलाइन उपलब्ध
आगरा में सोशल मीडिया पर कई ऐसे निराले पोस्टर वायरल हो जाते हैं जिन्हें देखकर कभी हंसी आती है तो कभी कोई पोस्ट सोचने पर मजबूर कर देता है। उधारी से बचने के लिए कारोबारी अपने प्रतिष्ठानों पर ऐसे पोस्टर चस्पा कर रहे हैं कि उधार मांगने वाले 100 बार सोचेंगे। इतना ही नहीं उधार बंदी से जुड़े ऐसे तमाम पोस्टर अब बाजारों में और आनलाइन बिक्री के लिए उपलब्ध हैं, जहां से छोटे और मध्यम कारोबारी अपनी दुकान के लिए इन्हें खरीद रहे हैं। आगरा की कई दुकानों में आपने कई ऐसे पोस्टर देखें होंगे, जिससे हंसी को कंट्रोल करने के बाद भी छूट जाती है। जैसे “कृपया उधार न मांगें, हमने खुद लोन ले रखा है", “उधार सिर्फ 80.90 साल के लोगों को दिया जाएगा वो भी उनके माता—पिता से पूछकर"। ऐसे तमाम पोस्टर आपको सोशल मीडिया से लेकर रियल लाइफ में कहीं न कहीं लगे मिल जाते हैं। जिसे पढ़ने के बाद चेहरे पर एक मुस्कान आ ही जाती है।आगरा के संजय प्लेस में एक दुकान पर पोस्टर लगा दिखा कि "ग्राहक राजा होता है और राजा कभी उधार नहीं मांगता", वहीं भगवान टॉकीज स्थित एक हार्डवेयर की दुकान पर पोस्टर लगा था कि "कृपया उधार न मांगें, हमने खुद लोन ले रखा है"। हालांकि इस तरह के पोस्टर दुकानो में दिख जाना अब आम हो चला है लेकिन इनमें बदलाव निरंतर जारी हैं।
ऐसे—ऐसे संदेश देखने को मिल रहे हैं जिनमें आग्रह है, भावुक संदेश छिपा है, कहीं कोई संदेश मजेदार तो कहीं कोई मजाकिया है। इंटरनेट और सोशल मीडिया से दुकानदार अपनी दुकान में चस्पा करने के लिए इन पोस्टरों को डाउनलोड कर ही लेते हैं लेकिन फौवारा मार्केट में कई दुकानों पर हमें उधार बंदी से जुड़े इस तरह के कई पोस्टर बिकते दिखे। यहां दुकानदारों ने बताया कि कुछ छोटे दुकानदार या ठेल—ढकेल वाले इन पोस्टरों को अपनी दुकान में लगाने के लिए खरीद लेते हैं। वहीं 100 से 150 रूपये की कीमत वाले ऐसे पोस्टर अब आनलाइन भी खूब मिल रहे हैं।
ऐसा ही एक बेहद विनम्र संदेश है "कृपया उधार न मांगें, असुविधा के लिए खेद है। व्यावहारिक संदेश है कि "आज नहीं, कल नहीं, उधार कभी नहीं! कृपया नगद दें।", भावुक संदेश है कि "उधार देना मतलब अपना बिजनेस बंद करना।", "मजाकिया संदेश है कि "उधार यहाँ नहीं मिलता है, लेकिन मुस्कान फ्री है! कटाक्ष है कि "उधार मांगकर शर्मिंदा न करें, ना हम उधार देंगे, ना आप गायब होंगे।", कुछ मजेदार संदेश भी हैं जैसे "उधार भी गजब की चीज है पहले लेने वाला गिड़गिड़ाए फिर देने वाला।", "ग्राहक हमारे भगवान हैं और भगवान को हम उधार दें इतनी हमारी औकात नहीं।", "उधार बंद, क्योंकि उधार लेने के लिए एक ही बार मांगना पडता है लेकिन देने के लिए कई बार मांगना पड़ता है।"
कुछ दुकानों में तो उधार लेने से पहले और बाद में बर्ताव की तुलना करते हुए भी संदेश लिखे गए हैं। जैसे जब उधार लेना होता है तो लोग इस तरह के शब्द इस्तेमाल करते हैं — लिख लेना, बाद में लेना, आकर देता हूं, भेज देता हूं, आकर ले जाना, कल दे दूंगा, सुबह देता हूं, शाम को देता हूं और जब देने की बारी आती है तो यह शब्द बदल जाते हैं जैसे — भरोसा नहीं है क्या, पहचानते नहीं क्या, भाग जाउंगा क्या, टेलीफोन करने पर साहब नहीं हैं, बिजी हैं, मीटिंग में हैं, थोड़ी देर में करना।