आगरालीक्स…21 जून, साल का सबसे लंबा दिन. करीब 13 से 14 घंटे तक रहती है सूर्य की रोशनी… जानिए ग्रीष्म संक्रांति और देवताओं की रात का रहस्य…
हर साल 21 जून का दिन कई मायनों में खास माना जाता है. यह केवल अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के कारण ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि खगोलीय और धार्मिक दृष्टि से भी इस दिन का विशेष महत्व है.
21 जून को ही क्यों होता है साल का सबसे बड़ा दिन ?
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की 21 जून के आसपास पृथ्वी की स्थिति ऐसी होती है कि उत्तरी गोलार्ध सूर्य की ओर सबसे अधिक झुका होता है. इस दिन सूर्य की किरणें कर्क रेखा पर लगभग सीधी पड़ती हैं. जिसके कारण सूर्य आकाश में अधिक समय तक दिखाई देता है और दिन की अवधि सबसे लंबी हो जाती है. भारत समेत उत्तरी गोलार्ध के अधिकांश देशों में इस दिन करीब 13 से 14 घंटे तक सूर्य की रोशनी रहती है. यही कारण है कि 21 जून को साल का सबसे बड़ा दिन कहा जाता है.
क्या है ग्रीष्म संक्रांति ?
खगोल विज्ञान में 21 जून की इस घटना को ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है. संक्रांति का अर्थ है सूर्य का एक स्थिति से दूसरी स्थिति में जाना. ग्रीष्म संक्रांति वह समय होता है जब सूर्य उत्तरी दिशा में अपनी अधिकतम स्थिति पर पहुंच जाता है. इसके बाद सूर्य का दक्षिण की ओर बढ़ना शुरू हो जाता है. यही कारण है कि 21 जून के बाद दिन धीरे-धीरे छोटे और रातें लंबी होने लगती हैं.
क्यों शुरू होती है देवताओं की रात ?
ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी के अनुसार धर्मग्रंथों और ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के उत्तरायण और दक्षिणायन का विशेष महत्व बताया गया है. मकर संक्रांति से लेकर लगभग छह महीने तक सूर्य की उत्तर दिशा की यात्रा को उत्तरायण कहा जाता है. इसे देवताओं का दिन माना गया है. वहीं जब सूर्य दक्षिण की ओर बढ़ता है तो उस अवधि को दक्षिणायन कहा जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दक्षिणायन देवताओं की रात का प्रतीक है. इसलिए 21 जून के बाद शुरू होने वाला समय देवताओं की रात की शुरुआत माना जाता है. 21 जून के बाद से सूर्य की गति दक्षिण की ओर होने लगती है, जिसे दक्षिणायन की शुरुआत माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि उत्तरायण को देवताओं का दिन और दक्षिणायन को देवताओं की रात माना जाता है। दक्षिणायन का समय आध्यात्मिकता, एकाग्रता, व्रत, संयम और आध्यात्मिक यात्रा के लिए उत्तम होता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से क्यों महत्वपूर्ण है यह समय ?
हिंदू परंपरा में सूर्य को जीवन, ऊर्जा और चेतना का स्रोत माना गया है. ग्रीष्म संक्रांति का समय आत्मचिंतन, साधना और आध्यात्मिक उन्नति के लिए विशेष माना जाता है. कई साधक इस दिन को ऊर्जा परिवर्तन के महत्वपूर्ण अवसर के रूप में देखती हैं. यही वजह है कि दुनियाभर में योग दिवस भी 21 जून को मनाया जाता है.
वैदिक ज्योतिष में कर्क संक्रांति –
वैदिक ज्योतिष और पाश्चात्य ज्योतिष दोनों में ही इस खगोलीय घटना को बड़े बदलाव के तौर पर देखा जाता है। ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी ने बताया की ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस दिन सूर्य मिथुन से कर्क राशि में प्रवेश करता है, जिसे कर्क संक्रांति कहते हैं। कर्क राशि का स्वामी चंद्रमा है, जो मन, जल और भावनाओं का वाहक होता है। अग्नि तत्व के सूर्य का चंद्रमा की राशि जल तत्व में जाना ऊर्जा का अनोखा संतुलन होता है।
प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. हृदय रंजन शर्मा जी
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