आगरालीक्स.. आगरा में मासूम बचपन नगर निगम की नाले की सफाई की गंदगी में खाली बोतल तलाश रहा है, जिससे सर्दी में पेट की आग को शांत कर सके, सेंट जोंस कॉलेज चौराहे के नजारे को देख वाहन भी थम गए लेकिन क्या करते। बच्चों को नाले की गंदगी से बोतल उठाते देखा, ग्रीन लाइट होते ही गाडी आगे बढा दी।
आगरा में जनवरी में स्वच्छता सर्वेक्षण हो रहा है, इसके लिए नालों की सफाई चल रही है। बुधवार को सेंट जोंस कॉलेज चौराहे पर नगर निगम की मशीन नाले की सफाई कर रही थी। यहां दो बच्चे खडे हुए थे, उनकी नजर नाले की गंदगी से निकलने वाली खाली बोतलों पर थी। नाले से गंदगी निकलते ही बच्चे उसे सडक पर डालने से पहले ही बोतल की तलाश में हाथ डाल दिया। बोतले मिलते ही उसे बोरे में रख लिया।
नंगे पैर और गंदगी में हाथ
राहगीरों की नजर दोनों बच्चों पर पडी, नंगे पैर बच्चों की नजर खाली बोतल पर थी। गंदगी में हाथ डालकर बोतल अपने बोरे में डाल रहे थे। जब गंदगी में बोतल नहीं आई तो नाले में झांकने लगे, उसमें प्लास्टिक के गिलास और बोतल दिखाई दे रही थी। इस उम्मीद के साथ कि बोतल मिल जाएगी, वहीं खडे हो गए और इस बार बोतल मिल गई।
संस्थाएं, अभियान लेकिन बचपन उदास
शहर में तमाम संस्थाएं हैं, अभियान भी चलाए जाते हैं। लेकिन बचपन उदास है। जिस उम्र में बच्चों के हाथ में किताब होनी चाहिए, उस उम्र में वे भूखे पेट गंदगी से बोतल निकाल रहे हैं, ये बोतल बेचने के बाद कुछ पैसे मिलेंगे। जिससे उनका और उनके परिवार का पेट भर सकेगा। ऐसे बच्चों को मुख्य धारा से जोडने के लिए कोई काम नहीं किया जा रहा है। आगरा में यह आम है, यहां तमाम बच्चे भीख मांग रहे हैं, कूडा बीच कर पेट भर रहे हैं।