आगरालीक्स…चम्मच जैसी चोंच वाली चिड़िया स्पूनबिल ने चम्बल सैंचुरी में दस्तक दी है। अफ्रीका, यूरोप और एशियाई मुल्कों से चम्बल नदी का रूख किया है। चम्मच जैसी चोंच वाली सफेद रंग की चिड़िया स्पूनबिल से चम्बल सैंचुरी आबाद हो गई है।
बाह के नन्दगवां और गोहरा के पास यह चिड़िया समूह में देखी गई है। पतली काली टांगों वाली स्पूनबिल मूलरूप से अफ्रीका, यूरोप और एशियाई मुल्कों पाई जाती है। पिछले तीन चार साल से चम्बल का रूख करने वाली यह चिड़िया ने मौसम साफ होते ही चंबल को अपना ठिकाना बना लिया है। वन विभाग से जुडेÞ जानकार बताते हैं कि चम्बल नदी का साफ पानी इस चिड़िया को रास आता है। नदी की मछली, जलीय कीडेÞ और छोटे मेढक स्पूनबिल का भोजन होते हैं।
प्रजनन काल सितम्बर, दिसम्बर के बीच होता है। प्रजनन काल के बाद ही स्पून बिल ने चम्बल का रूख किया है। एक बार में दो से चार अण्डे देती है। सात सप्ताह में इसके शिशु उड़ान भरने लगते हैं। नर मादा मिल कर अण्डो को सेते हैं। स्पूनबिल को देख कर चम्बल के दीदार को आने वाले देशी विदेशी सैलानी आश्चर्य में पडेÞ बिना नहीं रहते। इसकी चोंच को देखते ही दिमाग में सवाल उठने लगते हैं। चम्बल सफारी के केयर टेकर सुरेन्द्र सिंह ने बताया कि स्पून बिल के बारे में जानकर पर्यटक रोमांचित हुए बिना नहीं रहते।
रात के अंधेरे में शिकार की है खूबी
स्पून बिल की खासियत ये है कि यह चिड़िया रात के अंधेरे में भी चम्बल नदी में अपना शिकार पकड़ लेती है। वन विभाग के कर्मचारी चिड़िया की इस खूबी का जिक्र करते हुए कहते हैं कि इस तथ्य को जान कर पर्यटक भी आश्चर्यचकित हुए बिना नहीं रह पाते।
और भी चिड़ियों से चहकी चम्बल
चम्बल सैंचुरी में मौसम साफ होते ही कई चिड़ियों ने दस्तक दी है। सोबलर, पिन्टेल, कार्मोन्ट, बार हैडेडगीज, ओपनबिल स्टार्क, विसलिंग टील, रेड क्रिस्टेड पोचार्ड, ब्लैक आईविस आदि कई चिडियाओं की मौजूदगी से चम्बल चहक उठी है।