आगरालीक्स …विश्व में सबसे प्रदूषित शहरों की सूची में आगरा आठवें नंबर पर है, विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दुनिया के 859 शहरों की वायु गुणवत्ता के आंकड़ों को देख सूची जारी की है, टॉप 15 प्रदूषित शहरों में 14 शहर भारत के हैं। इसमें भी देश दुनिया में ताजमहल के शहर आगरा का नंबर आठवां हैं और यहां प्रदूषण का स्तर 131 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर है।
डब्ल्यूएचओ द्वारा जारी की गई सूची
1. कानपुर (173 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
2. फरीदाबाद (172 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
3. वाराणसी (151 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
4. गया (149 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
5. पटना ( 144 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
6. दिल्ली (143 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
7. लखनऊ (138 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
8. आगरा (131 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
9. मुजफ्फरपुर ( 120 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
10. श्रीनगर (113 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
11. गुरुग्राम (113 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
12. जयपुर (105 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
13. पटियाला (101 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
14. जोधपुर (98 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
15. अली सुबाह अल सलीम (कुवैत) (94 माइक्रोग्राम/ क्यूबिक मीटर)
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस रिपोर्ट को तैयार करने में सिर्फ 32 भारतीय शहरों के आंकड़ें को शामिल किया है। इसमें उत्तर प्रदेश के सिर्फ चार शहरों के आकड़ों लिए गए हैं। जबकि केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड मिलकर देश के 300 शहरों में वायु गुणवत्ता की निगरानी करते हैं। फिर भी, चौंकाने वाला तथ्य यह है कि डब्लूएचओ ने सिर्फ 32 शहरों का डाटा लिया है। शायद यह इसलिए हुआ है कि बाकी सभी शहरों के वायु गुणवत्ता से जुड़े आंकड़े सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। अगर यह आंकड़े डब्लूएचओ के पास उपलब्ध होते तो लिस्ट में और भी कई भारतीय शहरों के नाम शामिल हो सकते थे!
5 जनवरी 2018 को बिगडे हालात
5 जनवरी 2018 को आगरा में प्रदूषण का स्तर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है, एयर क्वालिटी इंडेक्ड एक्यूआई 500 रिकॉर्ड किया गया है। ऐसे में कोहरा छाने से स्मॉग के चलते बुजुर्ग और ह्रदय रोगियों के लिए घातक हो सकता है।
आगरा मे हालत बिगडने लगे हैं। यहां संजय प्लेस में एक्यूआई रिकार्ड किया जाता है, बुधवार दोपहर 4. 30 बजे संजय प्लेस आगरा में एक्यूआई 500 रिकॉर्ड किया गया है। यह खतरनाक स्तर पर है, एक्यूआई 200 से अधिक पहुंचने पर घातक होता है। पर्टिकुलेट मेटर पीएम 2. 5 का स्तर 500 तक पहुंचने से अस्थमा के रोगियों को समस्या हो रही है।
खांसते खांसते परेशान
एक्यूआई बढने से सांस उखडने लगी है, सरकारी और निजी अस्पतालों में मरीज पहुंच रहे हैं। पीएम 2. 5 सूक्ष्म कण होते हैं, ये फेंफडों तक पहुंच जाते हैं। इससे अस्थमा, सीओपीडी और सांस संबंधी बीमाारी से पीडित मरीजों की सांस की नस तेजी से सिकुडने लगती हैं, इससे सांस लेने में तकलीपफ होती है और मेडिकल इमरजेंसी के हालात बन जाते हैं। ऐसी स्थिति में अस्थमा और सांस संबंधी बीमारी से पीडित मरीज सुबह और रात को घर से बाहर ना निकलें। मुंह पर एन 95 मास्क लगा सकते हैं। इसके साथ ही बच्चों को भी खतरा रहता है।
हार्ट अटैक का बढा खतरा
हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ मनीष शर्मा का कहना है कि पीएम 2. 5 का स्तर बढने से हृदय रोगियों को भी समस्या हो रही है, इससे हार्ट अटैक की आशंका बढ गई है, खासतौर से ऐसे मरीज जिन्हें पहले से समस्या है, उन्हें अटैक पड सकता है।
सुबह और रात को घर से बाहर ना निकलें
पीएम 2. 5 का स्तर बढने से बच्चों, बुजुर्ग, अस्थमा, सीओपीडी के मरीजों को खतरा है, डॉक्टरों का कहना ळै कि ऐसे मरीज सुबह और शाम को घर से बाहर ना निकलें।
फाइल फोटो