आगरालीक्स.. आगरा से एसिड अटैक सर्वाइवर्स द्वारा शुरू किए गए शिरोज हैंगआउट पर बडा निर्णय लिया गया है, सपा सरकार में शिरोज हैंगआउट आगरा के बाद लखनऊ में खोला गया था, अब शिरोज हैंगआउट का नाम बदला जाएगा, इसका संचालन भी छांव फाउंडेशन नहीं कर सकेगी। भाजपा सरकार ने वित्तीय अनियमित्ताओं के बाद यह निर्णय लिया है।
एसिड अटैक सर्वाइवर्स के लिए छांव फाउंडेशन द्वारा आगरा के ताजगंज में शिरोज हैंगआउट खोला गया था, तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव शिरोज हैंगआउट से प्रभावित हुए और उन्होंने 2016 में लखनऊ में शिरोज हैंगआउट शुरू करा दिया। महिला कल्याण निगम ने फरवरी 2016 में शीरोज कैफे संचालित करने वाली छांव फाउंडेशन के साथ दो साल का करार किया था। इसमें महिला कल्याण निगम को हर माह 4.10 लाख रुपये छांव फाउंडेशन को देने थे। निगम ने अप्रैल 2016 से अक्टूबर 2016 की अवधि में कुल सात माह के 28.70 लाख रुपये दिए थे। फाउंडेशन को इसके वास्तविक बिल व बाउचर टिन नंबर सहित निगम को देना था। साथ ही कैफे की कमाई व खर्चे का पूरा विवरण व उपभोग प्रमाण पत्र भी देना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। छांव फाउंडेशन ने दो वर्ष बाद 17 मई, 2018 को अक्टूबर 2016 से मार्च 2018 तक के प्रपत्र व बिल बाउचर निगम को उपलब्ध कराए। हालांकि ये भी अपूर्ण हैं।एसिड अटैक पीड़िताओं को कम व दूसरों को ज्यादा वेतन कैफे में काम करने वाली एसिड अटैक पीड़िताओं को 12 हजार रुपये दिए जा रहे थे, जबकि कैफे में नियुक्त दूसरे पदों के लोगों को 25 हजार रुपये तक वेतन मिल रहा था। पहले वर्ष कैफे से जहां 5.69 लाख की आय हुई वहीं दूसरे वर्ष यह बढ़कर 72.64 लाख रुपये हो गई। यानि आय में लगभग 13 गुना वृद्धि हुई है, लेकिन इसका फायदा एसिड अटैक पीड़िताओं को नहीं मिला। कोर्ट ने 22 अक्टूबर तक लखनऊ में शिरोज हैंगआउट खाली कराने के लिए कहा है।
बदला जाएगा नाम
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, महिला कल्याण मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी ने कहा कि लखनऊ में एसिड अटैक पीड़िताओं द्वारा संचालित कैफे बंद नहीं होगा। वित्तीय अनियमितताओं के कारण इसका संचालन छांव फाउंडेशन से नहीं कराया जाएगा। महिला कल्याण निगम इसका संचालन कोआपरेटिव बनाकर करेगा। इसका नाम शीरोज हैंगआउट के बजाय कोई दूसरा रखा जाएगा।