आगरालीक्स… आगरा में महिलाओं के आॅपरेशन नाभि के माध्यम से हो सकेंगे, छेद नहीं करना पडेगा, सर्जरी के क्षेत्र में बडा बदलाव हो रहा है, रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी में छोटे से छोटे छेद से ऑपरेशन करने की तकनीकी आ चुकी हैं। ऐसे में नाभि के माध्यम से भी ऑपरेशन किए जा रहे हैं। जिससे छेद न करना पडे। शुक्रवार को यूपीएसीकॉन में होटल ग्रांड इम्पीरियल में कैंसर सहित जटिल ऑपरेशन करने की अत्याधुनिक विधि पर चर्चा की गई।
एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडे ने बताया कि खान-पान व जीवन शैली के चलते भारत में हर साल दो लाख कैंसर के नए मरीज पैदा हो रहे हैं। 40 फीसद मुंह और गले के कैंसर के मरीज हैं, महिलाओं के कैंसर में 25 से 30 फीसद स्तन कैंसर के मामले आ रहे हैं। इन कैंसरों का प्रारंभिक अवस्था में पता चलने पर रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक सर्जरी से इलाज कर जान बचाई जा सकती है। मगर, कैंसर का देर से पता चलने व समय पर इलाज न मिलने के चलते 50 फीसद कैंसर रोगियों की मौत हो रही है। इसे कम करने के लिए मेडिकल कॉलेज में कैंसर विभाग के प्रोफेसर दो की जगह तीन पीजी स्टूडेंट को प्रशिक्षण दे सकते हैं। अभी देश में 100 कैंसर सर्जन हर वर्ष तैयार हो रहे हैं। इनकी संख्या बढाने की कवायद चल रही है।
डॉ राजीव सिन्हा झांसी ने बताया कि महिलाएं ऑपरेशन के चीरे और लेप्रोस्कोपिक विधि से होने वाले छेद से बचना चाहती हैं। इसके लिए 2008 में नाभि के माध्यम से लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन करना शुरू किया। वे चार हजार ऑपरेशन कर चुके हैं। इसमें हर्निया से लेकर पित्त की थैली की पथरी के ऑपरेशन शामिल हैं। डॉ योगेश मिश्रा लखनउ ने बताया कि अब लेप्रोस्कोपिक विधि से ऑपरेशन के लिए छोटे से छोटे छेद करने की तकनीकी पर काम चल रहा है। तीन मिलीमीटर के छेद से ऑपरेशन किए जा रहे हैं। साथ ही रोबोटिक और लेप्रोस्कोपिक विधि की अत्याधुनिक तकनीकी में एक मिलीमीटर की चीज एक सेंटीमीटर की दिखाई देती है।
प्राइमरी व जिला अस्पतालों की स्थित में सुधार से ही सुधरेगा देश का स्वास्थ्य
सरकारी सिस्टम खराब, जिला अस्पतालों में नहीं होते सामान्य ऑपरेशन
आगरा। एसोसिएशन ऑफ सर्जन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष डॉ मनोज पांडे ने सरकारी सिस्टम पर चिंता जताते हुए कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पतालों में मरीजों की बीमारी की डायग्नोसिस के साथ हर्निया सहित अन्य ऑपरेशन हो जाने चाहिए लेकिन ऐसा होता नहीं है। यहां से मरीज मेडिकल कॉलेज पहुंच जाते हैं। इसके चलते मेडिकल कॉलेज में सामान्य हर्निया और पित्त की थैली के ऑपरेशन किए जा रहे हैं। जबकि जटिल ऑपरेशन होने चाहिए। इसके लिए मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों के साथ पैरामेडिकल स्टाफ और नर्स की संख्या भी बढाई जानी चाहिए।