आगरालीक्स… आगरा सहित देश भर में कॉफी कैफे डे (सीसीडी) के संस्थापक वीजी सिद्धार्थ (60) का शव नदी में मिलने के बाद शोक में सीसीडी बंद। उनका कथित पत्र सामने आने के बाद कर्ज में डूबने पर सुसाइड की बात कही जा रही है, पुलिस जांच कर रही है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार , सोमवार रात वीज सिदृार्थ अपने ड्राइवर से टहलने जाने की बात कहकर चले गए थे,उनके लापता होने के बाद 25 तैराकों समेत 200 लोग सर्च ऑपरेशन में जुटे थे। कोस्ट गार्ड के जहाज आईसीजीएस राजदूत और एसीवी (एच-198) की भी मदद ली गई। बुधवार सुबह मेंगलुरु की नेत्रावती नदी से उनका शव मिला। शोक की लहर दौड पडी।
वीजी सिद्धार्थ का जन्म कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में हुआ था। उनका परिवार 140 साल से कॉफी प्लांटेशन से जुड़ा हुआ है। 1993 में सिद्धार्थ ने कॉफी-डे ग्लोबल (अमलगेमेटेड बीन कॉफी ट्रेडिंग कंपनी) की शुरुआत की थी। 1993 में सिद्धार्थ ने कॉफी-डे ग्लोबल की शुरुआत की, कर्नाटक में सीसीडी के पास 12,000 एकड़ जमीन में कॉफी का प्लांटेशन है। इस साल मार्च तक देशभर में सीसीडी के 1,752 कैफे थे।
यह था रिवेन्यू
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 में कैफे कॉफी-डे ग्लोबल का रेवेन्यू 1,777 करोड़ रुपए और 2018-19 में 1,814 करोड़ रुपए पहुंच गया। मौजूदा वित्त वर्ष खत्म होने पर कंपनी को 2,250 करोड़ रुपए के रेवेन्यू की उम्मीद है। लेकिन, दूसरा पहलू यह भी है कि पिछले कुछ सालों से सिद्धार्थ कॉफी बिजनेस समेत अन्य कारोबारों में नकदी संकट से जूझ रहे थे।
27 जुलाई को लिखा पत्र
‘कर्जदाताओं के दबाव से टूट चुका हूं’
‘‘बेहतर प्रयासों के बावजूद मैं मुनाफे वाला बिजनेस मॉडल तैयार करने में नाकाम रहा। मैंने लंबे समय तक संघर्ष किया लेकिन अब और दबाव नहीं झेल सकता। एक प्राइवेट इक्विटी पार्टनर 6 महीने पुराने ट्रांजेक्शन से जुड़े मामले में शेयर बायबैक करने का दबाव बना रहा है। मैंने दोस्त से बड़ी रकम उधार लेकर ट्रांजेक्शन का एक हिस्सा पूरा किया था। दूसरे कर्जदाताओं द्वारा भारी दबाव की वजह से मैं टूट चुका हूं। आयकर के पूर्व डीजी ने माइंडट्री की डील रोकने के लिए दो बार हमारे शेयर अटैच किए थे। बाद में कॉफी डे के शेयर भी अटैच कर दिए थे। यह गलत था जिसकी वजह से हमारे सामने नकदी का संकट आ गया।’’
‘‘मेरी विनती है कि आप सभी मजबूती से नए मैनेजमेंट के साथ बिजनेस को आगे बढ़ाते रहें। सभी गलतियों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। सभी वित्तीय लेन-देनों के लिए मैं जिम्मेदार हूं। मेरी टीम, ऑडिटर्स और सीनियर मैनेजमेंट को मेरे ट्रांजेक्शंस के बारे में जानकारी नहीं है। कानून को सिर्फ मुझे जिम्मेदार ठहराना चाहिए। मैंने परिवार या किसी अन्य को इस बारे में नहीं बताया।’’
‘‘मेरा इरादा किसी को गुमराह या धोखा देने का नहीं था। एक कारोबारी के तौर पर मैं विफल रहा। उम्मीद है कि एक दिन आप समझेंगे, मुझे माफ कर दीजिए। हमारी संपत्तियों और उनकी संभावित वैल्यू की लिस्ट संलग्न कर रहा हूं। हमारी संपत्तियां हमारी देनदारियों से ज्यादा हैं। इनसे सभी का बकाया चुका सकते हैं।’’
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