आगरालीक्स.. आगरा में कांस्टेबल भर्ती में बायोमीट्रिक सत्यापन में फर्जीवाडा करने के आरोप में टीसीएस कंपनी के कर्मचारी सहित चार अरेस्ट किए गए हैं।
आगरा के पुलिस लाइन में पीएसी आरक्षी भर्ती परीक्षा के दस्तावेज सत्यापन और शारीरिक मानक परीक्षण का कार्य चल रहा है। 20 मुन्नाभाई पकड़े गए थे। दस्तावेज सत्यापन का कार्य देख रही टीसीएस कंपनी के अधिकारी को पिछले दिनों धमकी दी गई थी।
हरीपर्वत थाने में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू की थी। इसमें सामने आया कि कंपनी के ही कर्मचारी फर्जीवाड़ा करके सत्यापन का कार्य करा रहे हैं।
प्रेसवार्ता में एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि हरीपर्वत के खंदारी से चार लोगों को पकड़ा है। मथुरा के बल्देव थाना क्षेत्र स्थित गांव भरतिया निवासी तरुण गौतम, उसका भाई प्रवीण, फरह स्थित गांव चौकीपुरा निवासी रुपेंद्र और फिरोजाबाद के एका स्थित गांव मदीपुरा निवासी विक्रम हैं।
तरुण टीसीएस कंपनी का कर्मचारी है। वहीं रुपेंद्र पूर्व कर्मचारी है। उसने मार्च में नौकरी छोड़ दी थी। तरुण बायोमेट्रिक सत्यापन में लगाया गया था। पूछताछ में पता चला कि तरुण अपने खंदारी स्थित आवास पर बायोमेट्रिक मशीन को ले जाता था।
इस दौरान मुन्नाभाइयों का सत्यापन करता था। अगले दिन मुन्नाभाई के आने पर फर्जी तरीके से हाजिरी लगा देता था। 12 दिसंबर को फतेहाबाद के गांव कुटुकपुरा गूजर निवासी भगवती और खेरागढ़ के शेखपुरा निवासी दलवीर का परीक्षण होना था। उन्होंने परीक्षा में मुन्नाभाई बैठाए थे। इसलिए तरुण से संपर्क किया।
11 दिसंबर को तरुण ने अपने साथियों के साथ मिलकर दोनों अभ्यर्थियों के स्थान पर मुन्नाभाइयों के सत्यापन का कार्य कर दिया था। उनसे 60-60 हजार रुपये लिए गए थे। तरुण के इशारे पर रुपेंद्र ने ही टीसीएस कंपनी के अधिकारी को धमकी दी थी। उनके पास से लैपटॉप, बायोमेट्रिक मशीन और छह मोबाइल बरामद हुए हैं।