आगरालीक्स… आगरा में कोरोना से जंग हार गर डॉ शैलेंद्र शर्मा को भावजंलि, आईएमए के पूर्व अध्यक्ष, वरिष्ठ बाल रोग विशेषज्ञ डॉ जेएन टंडन
शालीनता के पर्याय डॉ शैलेन्द्र शर्मा
मेरी बौद्धिक विकास यात्रा के अग्रज सहयात्री, प्रखर व्यक्तित्व, सुसंस्कृत चिकित्सक, मूल्यों की मर्यादा को पहचान देने वाले, शब्दो को एक नया रूप, नया अर्थ, नई स्वरूप लय प्रदान करने वाले एक शख्श नही बल्कि शख्सियत हमारे नायक डॉ शैलेंद्र शर्मा जी का अवसान प्रकृति के क्रूर हाथो से हमारी बैद्धिक संपदा के लुटने का अहसास है।संवेदनशील सह्रदय जनप्रिय चिकित्सक होने के बावजूद उनकी रुचि कलात्मक और साहित्यिक थी।उनका व्यवहार सम्पूर्ण मानवीय संवेदनाओं के ढांचे में ढला हुआ था।उनका चित अपनत्व के भाव से भरा श्रद्धा , विश्वास और विन्रमता की त्रिमूर्ति था। चाहे धर्मयुग और हंस जैसी स्तरीय पत्रिकाओं मे प्रकाशित कहानियों का संग्रह हो, चाहे एपीआई की पुस्तकों का संपादन हो, चाहे डायबिटीज फोरम के मुखपत्र में छपे आलेख और संपादन की जिम्मेदारी हो,चाहे फेसबुक के अलग अलग साहित्यक मंचो पर देश के प्रतिष्ठित कहानीकारों के साथ उनकी कहानियों की प्रस्तुति हो,चाहे काव्यमंच पर स्वरचित काव्य रचना का अचंभित करने वाला पाठ हो,चाहे निज और सार्वजनिक मंचो पर उनका अनूठा संचालन हो, चाहे आई एम ए के बुलेटिन के औपचारिक सलाहकार की भूमिका हो, चाहे चिकित्सक संगठनों की तमाम सांस्कृतिक संध्या के आयोजन केवल उनकी अवधारणा पर आयोजित हुए हो, चाहे उस ऐतिहासिक शाम कलाकृति में आयोजित मेरे आई एम ए अध्यक्ष काल मे डॉक्टर्स डे पर आयोजित सम्पूर्ण कार्यक्रम में सूत्रधार के रूप में यादगार संचालन किया हो सब कुछ चुपचाप बिना अपना गाल बजाए, बिना व्हाट्सअप और अखबारों में अपना ढोल बजाए निबटा दिया।उनकी जिंदगी की कहानी का पटाक्षेप हो गया लेकिन उसकी चमक आज भी हम सबको आलोकित कर रही है।
छात्र जीवन से अपनी बड़ी बहिन और उनकी जीवनसंगनी डॉ रत्ना शर्मा जी से घनिष्ठता रहते हुए मै कालांतर में शर्मा परिवार का हिस्सा बन गया।पिता, पति मित्र और परिवार सदस्य की भूमिका में वो एक प्रेणादायी किस्सा थे।जबभी मैं शब्दों के लिए भटका उनकी शरण मे गया। उनकी विदाई ने उनके घनिष्ठतम मित्रो की टोली को मानसिक रूप से लहूलुहान कर दिया है।उस टोली के प्रमुख अंग डॉ मुनीश्वर गुप्ता, डॉ राकेश भाटिया, डॉ सुनील बंसल, डॉ भूपेंद्र आहूजा, डॉ एम एस अग्रवाल जी रहे हैं। मध्यरात्रि और अंधकार के सन्नाटे में उनके दाहसंस्कार के बाद लौटते हुए मैं आश्वस्त हो गया कि कोरोना ने हमारी जिंदगी बदल दी।
शालीनता की प्रतिमूर्ति, कला संस्कृति के कर्मयोगी डॉ शैलेन्द्र शर्मा जी को शत शत नमन।
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डॉ जे एन टंडन
पूर्व अध्यक्ष आई एम ए आगरा।