आगरालीक्स (देवेंद्र कुमार)…. क्या अब कोरोना वायरस बदला ले रहा है? आगरा के एसएन के मेडिसिन विभाग के पूर्व विभाध्यक्ष डा एके गुप्ता ने आगरालीक्स को बताई कोरोना वायरस की ए बी सी डी, आम भाषा में।
प्रश्नः क्या कोरोना वायरस बदला ले रहा है, अबकी बार ज्यादा घातक है।
कोरोना भी वायरस है, यह फ्लू वायरस है। इसमें सर्दी जुकाम और बुखार आता है, गले में खराश के साथ फेफडों में संक्रमण होने से सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कोरोना की पहली लहर दिसंबर आने तक थम गई, एक तरह से कोरोना वायरस निष्क्रिय हो गया, वायरस ने अपना रूप बदला , वायरस मनुष्य के शरीर में कोशिकाओं से चिपकता है उसका स्ट्रक्चर बदल दिया। यह स्वत: प्रक्रिया है, यह सभी देशों में हुआ, भारत में भी हुआ। अब भारत में वायरस के कई स्ट्रेन हैं, नया स्ट्रेन जब आता है तो संक्रमण तेजी से फैलता है, यही इस वायरस के साथ हो रहा है।
प्रश्न: वायरस स्ट्रेन क्यों बदलता है ।
जवाब: डार्विन की थ्योरी, जीवित बचे रहने के लिए हर कोई संघर्ष करता है। इसी तरह से कोरोना वायरस सक्रिय रहने के लिए अपना स्ट्रक्चर बदल रहा है। जो वायरस तेजी से स्ट्रक्चर नहीं बदल पाते वो मर जाते हैं. जैसे पोलियो का वायरस अपना स्ट्रक्चर नहीं बदल पाया और वो खत्म हो गया- ऐसे ही चिकन पाॅक्स का भी वायरस ज्यादा रूप नहीं बदल पाता तो वह कुछ दिनों में खत्म हो जाएगा- लेकिन जुकाम का वायरस बार-बार अपना रूप बदलता रहता है जिसके कारण इसका वायरस मर नहीं पाता. इसके कारण साल में कई बार हम लोगों को जुकाम होता रहता है. बार-बार रूप बदलने से उसके खिलाफ वैक्सीन नहीं बन पाती. इसी तरह से शरीर में भी एंटीबाडीज बनती हैं। मगर, जब दूसरी बार नए रूप में वायरस संक्रमित करता है तो पुरानी एंटीबाडीज काम नहीं कर पाती। इसी तरह से कोरोना वायरस है. कोरोना का जो वायरस है ये भी स्ट्रक्चर बदल रहा है लेकिन इसकी स्पीड इतनी तेज नहीं है. कुछ लोग कहते हैं कि वायरस का रूप ब्राजील वाला है या फिर इंग्लैंड का है, इसका कोई मतलब नहीं है. इंडिया में भी दो से पांच जगह कोरोना का बदला हुआ स्ट्रक्चर मिल जाएगा- इस बार यह ज्यादा तेजी से फैल रहा है इसलिए जान ज्यादा जा रही हैं.
प्रश्न: एक बार संक्रमित हो चुके हैं वे दोबारा क्यों संक्रमित हो रहे हैं
जवाब: कोरोना वायरस का स्ट्रेन बदल रहा है। एक बार कोरोना होने के बाद जब एंटीबाॅडीज बन जाती है तो दूसरी बार कोरोना का स्ट्रक्चर बदलने पर दोबारा संक्रमण चपेट में ले लेता है लेकिन क्योंकि उसने एंटीबाॅडीज पहले बना रखी है इसलिए सेकेंड इंफेक्शन जो होगा, वो इतना ज्यादा शरीर पर प्रभाव नहीं डालेगा. इसीलिए वैक्सीन के बाद जो एंटीबाॅडीज बन गईं तो हो सकता है कि अलग तरह का जो वायरस आएगा उससे आप दोबारा संक्रमित हो सकते हैं. लेकिन पहले बनी एंटीबाॅडीज आपको वायरस के बदले रूप से लड़ने के लिए काम आ सकती है. इसीलिए वैक्सीन लगना आवश्यक है. वैक्सीनेशन में ये मरा हुआ वायरस ही बाॅडी के अंदर डाला जाता है. इससे एंटीबाॅडीज बनती हैं. देश में इस समय दो तरह की वैक्सीन है कोवैक्सीन और कोविशील्ड. इनमें एक वैक्सीन में मरा हुआ वायरस है तो एक में मरे के समान ही वायरस है. इसीलिए वो एंटीबाॅडीज तो बना देगा लेकिन इंफेशन नहीं करेगा.