आगरालीक्स …आगरा में बाल रोग विशेषज्ञों की कार्यशाला में बच्चों के गुस्से को कंट्रोल करने पर चर्चा की गई। होटल फोर प्वाइंट में एडोलिसेन्ट हेल्थ एकेडमी (एएचए) व इंडियन पीडिएट्रिक एसोसिएशन (आईएपी) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के समापन समारोह में रविवार को डॉ हिमा बिंदू सिंह ने अपने रिपोर्ट पेश की। इसमें उन्होंने बताया कि दुनिया में पांच मिलियन मौतें हिंसक कारणों से हो रही हैं, इसमें 95 फीसद से ज्यादा मौतें विकासशील देशों में हैं। यानि अब हमें मलेरिया, हैजा, जैसी कम्इयूनिटी डिजीज से लड़ने के बजाय हिंसक प्रवृति का कारण हो रही मौतों से लड़ना होगा। उन्होंने बताया कि हिंसा का मतलब सिर्फ लड़ाई ऋगड़ा ही नहीं, भावनात्मक हिंसा जैसे प्यार में धोका, परीक्षा में असफलता, माता-पिता या शिक्षक की डांट भी कारण हो सकती है। क्योंकि यह प्राकृतिक नहीं। इन्हें हम अपने प्रयासों से रोक सकते हैं। रोकथाम के लिए 9-10 साल की उम्र के बच्चों को गुस्से के कंट्रोल करना सिखाना चाहिए, इसके लिए परिजनों को आगे आना होगा, उन्हें ऐसे गैम न खेलने दें जिससे उनका व्यवहार उग्र हो, बच्चों को फोन का सही इस्तेमाल करना सिखाएं। उनके साथ खेलें और खेलने, पढने सहित क्रिएटिव काम करने की हॉबी विकसित करें। उन्होंने बताया कि कैट कोला माइंस हार्मोन, जो पुरुषों में अधिक होता है, के बढ़ने से हिंसक प्रवृति बढ़ जाती है। बच्चों में हिंसक प्रवृति और आक्रमता बढ़ने एक मुख्य कारण एकल परिवार और टूटते परिवार भी हैं।

युवा नहीं होंगे और बुजुर्ग रह जाएंगे
डॉ किरन वासवानी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 1990 से 2013 तक 25 सालों में कम्युनिटी डिजीज 25 फीसद तक कम हुए हैं, जबकि जीवनशैली से जुडी मधुमेह, दिल के रोग, मोटापा बढ रहे हैं। 5 8 मिलियन भारतीय यानी 25 फीसद भारतीय जीवनशैली से जुडी बीमारियों से पीडित हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे के अनुसार मोटापे के शिकार 60 फीसद लोगों की जीवनशैली से जुडी बीमारियों से मौत हो रही है। कुछ सालों बाद देश में बुर्जग रह जाएंगे और उन्हें संभालने के लिए युवा नहीं होंगे।
73 फीसद किशोर एनीमिया के शिकार, पढने में नहीं लगता मन
डॉ अनुपम सचदेव ने बताया कि तीन साल की उम्र तक आयरन की कमी नहीं होनी चाहिए, ऐसा होने पर बच्चों के मष्तिक का विकास नहीं होता है। लेकिन भारत में 73 फीसद किशोर एनीमिया खून की कमी के शिकार हो रहे हैं। इसके पीछे एक बडा कारण अधिकांश लोग शाकाहारी हैं, सब्जियों से 10 फीसद आयरन शरीर में अवशोषित होता है, इसमें भी लोहे के बर्तनों में खाना बनना बंद हो गया है, इससे भी शरीर में आयरन कम पहुंच रहा है, ऐसे में सब्जियों में नीबू सिट्रिक एसिड का इस्तेमाल किया जाए तो 22 फीसद आयरन अवशोषित हो सकता है। जबकि मासाहारी भोजन से 33 फीसद आयरन शरीर में अवशोषित होता है।
40 पेपर प्रजेंट, किए गए पुरस्क्रत
समारोह में 40 पेपर प्रजेंट किए गए, इसमें 18 पोस्टर प्रजेंट किए। डॉ के शारदा, डॉ अश्वनी आनंदम और डॉ जयश्री को बेस्ट पेपर के लिए पुरस्क्रत किया गया।
प्रथम तीन छात्रों को किया गया सम्मानित
राष्ट्रीय कार्यशाला में छात्रों और अभिभावकों से भी विशेषज्ञों ने संवाद किया था। इसके साथ ही निंबध प्रतियोगिता आयोजित की गई। इसमें सिम्बोजिया स्कूल की 11 वीं की छात्रा दीक्षा चंदवानी प्रथम, मिल्टन पब्लिक स्कूल के 11 वीं के छात्र शांतनु सिंह द्वितीय और सेंट पीटर्स के 12 वीं के छात्र रेवांत गौतम व सेंट कॉनरेडस के 10 वीं की छात्रा रुशाली मेहरोत्रा संयुक्त रूप से तीसरे स्थान पर रहीं।
बच्चों के साथ बुजुर्गों के लिए भी चिकनपॉक्स की वैक्सीन
समापन समारोह में नोवो कंपनी द्वारा चिकनपॉक्स की वैक्सीन नेक्सीकॉक्स लांच की गई। इस वैक्सीन को 15 महीने के बच्चे में पहले डोज और उसके तीन महीने बाद 18 महीने पर दूसरी डोज लगवानी होती है। इससे चिकनपॉक्स नहीं हो सकता है। इस वैक्सीन को युवा और बुजुर्ग भी किसी भी समय लगवा सकते हैं, दो डोज में तीन महीने का अंतर होना चाहिए।
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