आगरालीक्स…पति की मौत से अपनी मौत तक एक—एक पैसे के लिए जूझी सुमन के घर पहुंची ‘मदद’. 6 मासूम बच्चों के पास गेहूं, चावल, कंबल के साथ 5 हजार रुपये. अब घर, शिक्षा सबकुछ होगा लेकिन…
एटा के शीतलपुर ब्लॉक के गांव नगला पवल में रहने वाली जिस सुमन ने तंगहाली और अपने बच्चों को भूखा देखकर निराश होकर जान दे दी, अब उस सुमन के घर ‘मदद’ पहुंची है. प्रशासनिक अधिकारियों ने बच्चों के लिए गेहूं, चावल, कंबल के साथ पांच हजार रुपये भी दिए. हर महीने आर्थिक मदद भी की जाएगी. पीएम आवास, अंत्योदय कार्ड के साथ सभी बच्चों की शिक्षा भी फ्री होगी.
दोे साल पहले पति की मौत के बाद वृद्ध सास और अपने छह बच्चों की जिम्मेदारी संभाल रही सुमन की उम्मीदें तब टूट गईं जब रविवार को उसके बच्चे भूखे रह गए. घर में 8 सदस्य थे और मुट्ठी भर आटा से छह रोटियां बनीं. जब टुकड़ों में ये रोटियां सभी बच्चों के पास पहुंची तो मां का दिल पसीज गया. उसकी जीने की चाह खत्म हो गई और सोमवार रात को कीटनाशक पीकर अपनी जान दे दी. पति की मौत के बाद से अपनी मौत तक सुमन एक—एक पैसे की मदद के लिए तरसती रही लेकिन मदद तो दूर सरकारी योजनाओं के जरिए भी उसे अपना हक तक न मिला.
सुमन की मौत के बाद मंगलवार रात को ही एसडीएम सदर जगमोहन गुप्ता उसके घर पहुंचे. पांच हजार रुपये, 10 कंबल दिए. राशन डीलर की ओर से 30 किलो चावल—गेहूं रखवा दिया. एसडीएम ने सभी बच्चों को सरकारी योजनाओं के माध्यम से चार हजार रुपये महीना दिलवाने का आश्वासन दिया. शीतलपुर के प्रभारी बीडीओ प्रभुदयाल भी पहुंच गए उन्होंने भी पीएम आवास, कार्ड, पारिवारिक लाभ योजना आदि दिलाने का आश्वासन दिया.
सीडीओ डॉ. नागेंद्र नारायण मिश्र ने बताया कि मामला जानकारी में आने के बाद इसकी जांच कराई गई तो परिवार की स्थिति वास्तव में दयनीय निकली. उन्होंने कहा कि अब तक उन्हें विभिन्न योजनाओं का लाभ न मिल पाना भी चिंता का विषय है. अब नौ बिंदू तैयार किए गए हैं. इसके तहत परिवार को पीएम आवास, अंत्योदय कार्ड, कौशल विकास मिशन के तहत प्रशिक्षण, मनरेगा जॉब कार्ड, बच्चों की निशुल्क शिक्षा आदि पर कार्य किया जाएगा.
8 लोगों के लिए 6 रोटियां बनीं
घर में जितना आटा था, उससे केवल छह रोटियां बनीं. ऐसे में ये रोटियां टुकड़ों में बंटी तो सुमन का कलेजा भर आया. यहीं उसे उसके जीने की चाह खत्म हो गई और अगले दिन सोमवार को जान दे दी.
छह बच्चों में सबसे बड़ी बेटी छाया ने बताया कि पापा की मौत के बाद घर का गुजारा करना मुश्किल हो रहा था. हम लोगों के खाने के लिए पर्याप्त भोजन तक नहीं मिल पा रहा था जिसके कारण मां मानसिक रूप से परेशान रहती थी. घर पर काम करने के बाद दूसरों के खेतों पर मजदूरी कर किसी तरह बच्चों को पालती थी. छाया ने बताया वह और उसकी बहनें मोहिनी, सुधा और संतोषी के साथ भाई कन्हैया सरकारी स्कूल में पढ़ने के लिए जाता था. छोटा भाई विवेक घर पर ही रहता है. छाया ने बताया कि स्कूल में हम मध्यान्ह का भोजन खा लेते थे लेकिन रविवार को छुट्टी थी तो हम लोग घर पर ही थे तो दिन में खाना नहीं मिला. शाम को घर पर मुट्ठीभर आटा था जिससे छह रोटियां ही बन पाईं.
वृद्धा रामबेटी ने रोते हुए बताया कि रोटी टुकड़ों में बच्चों के पास पहुंची तो किसी का पेट नहीं भरा. उसके पास भी रोटी का टुकड़ा आया. इस बात से सुमन बहुत दुखी हो गई और अगले दिन सोमवार को उसने जान दे दी.