आगरालीक्स… आगरा सबसे प्रदूषण शहरों में दूसरे स्थान पर है, प्रदूषण कैसे कम हो, एसएसपी अमित पाठक ने कूडा जलाते देख युवक को पकड लिया, उससे कान पकडकर उठक बैठक लगवाई, कभी भी कूडा न जलाने का संकल्प दिलवाया।
मंगलवार को वायु गुणवत्ता सूचकांक में तालचर 414, उसके बाद दूसरे नंबर पर आगरा का एक्यूआई 404 रिकॉर्ड किया गया। आगरा के वायु गुणवत्ता सूचकांक में पीएम 2 5 का स्तर खतरनाक स्तर तक पहुंच चुका है, यह 489 रिकॉर्ड किया गया। पीएम 2 5 सूक्ष्म कण होते हैं, यह सांस के माध्यम से फेफडों से होते हुए खून और दिल तक पहुंच जाते हैं। इससे शुरूआत में सांस संबंधी परेशानी होती है, यह स्तर लगातार बना रहे तो हार्ट अटैक तक पड सकता है।
सांस लेना मुश्किल
इस मौसम में प्रदूषण का स्तर बढने से लोगों को सांस लेना मुश्किल हो रहा है, एक्यूआई का सामान्य स्तर 50 होना चाहिए, यह 400 से अधिक पहुंच चुका है। सबसे ज्यादा परेशानी अस्थमा के मरीजों को हो रही है, वे सांस नहीं ले पा रहे हैं, डॉक्टरों के पास मरीजों की संख्या लगातार बढ रही है। इसी तरह से बच्चों को भी सांस की परेशानी होने लगी है, इससे बच्चों को सर्दी जुकाम होने के बाद हालत बिगड रही है और निम्युलाइजर लगाना पड रहा है।
कूडा जलाने और निर्माण कार्य से बिगड रहे हालात
आगरा में वायु प्रदूषण का स्तर बढने के दो बडे कारण कूडा जलाना और हाईवे सहित चल रहे निर्माण कार्य से सूक्ष्म कणों की मात्रा बढना है, इससे प्रदूषण का स्तर लगातार बढता जा रहा है और घातक स्तर तक पहुंच चुका है।