आगरालीक्स…हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज आपके गुर्दे कर रहे खराब. तेजी से बढ़ रही डायलिसिस के मरीजों की संख्या. आगरा में गुर्दा रोग विशेषज्ञों ने दी बीमारी के रोकथाम और प्रारंभिक अवस्था में पता कर इलाज की जानकारी
मधुमेह और उच्च रक्तचाप से गुर्दे की समस्या कई गुणा बढ़ गई है। गुर्दा रोग का प्रारंभिक अवस्था में पता भी नहीं चल रहा है इससे डायलिसिस के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। रविवार रात को होटल ताज व्यू में आगरा नेफ्रोलाजिकल फोरम की कार्यशाला में गुर्दा रोग की रोकथाम और प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का पता कर इलाज शुरू करने पर चर्चा की गई। आगरा नेफ्रोलाजिकल फोरम के डॉ. तरुण मित्तल ने बताया कि युवाओं में गुर्दा रोग की बीमारी तेजी से बढ़ रही है। सरकारी और निजी अस्पतालों के डायलिसिस सेंटर फुल हैं जबकि इन बीमारियों की रोकथाम संभव है। मरीज को डायलिसस और किडनी ट्रांसप्लांट से भी बचाया जा सकता है। मधुमेह, उच्च रक्तचाप से लेकर गर्भावस्था, वायरल संक्रमण में गुर्दे की बीमारी हो रही है।
एसएन मेडिकल कालेज के नेफ्रोलाजी विभाग के डॉ. अपूर्व जैन ने बताया कि गुर्दा रोग के मरीज एडवांस स्टेज में आ रहे हैं। प्रारंभिक अवस्था में बीमारी का पता नहीं चल रहा है। इससे डायलिसिस और गुर्दा प्रत्यारोपण की विकल्प बचता है। एसएन मेडिकल कालेज के मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. एके गुप्ता ने बताया कि फिजीशियन पर आने वाले मरीजों में गुर्दा रोग की भी जांच कराई जानी चाहिए। बीमारी की रोकथाम प्रारंभिक अवस्था में ही हो सके। एसएन के प्राचार्य डॉ. प्रशांत गुप्ता ने कालेज में किए गए पहले सफल गुर्दा प्रत्यारोपण पर चर्चा की। टीम वर्क से सफल गुर्दा प्रत्यारोपण किया गया। डॉ. मुदित खुराना ने संचालन किया। मणिपाल यूनिवर्सिटी से डॉ. संजीव गुलाटी, एसजीपीजीआइ से डॉ. धर्मेंद्र एस भदौरिया, सर गंगाराम हास्पटिल, दिल्ली से डॉ. अनुराग गुप्ता, एसजीपीजीआइ के नेफ्रोलाजी विभाग के हेड प्रो. नारायन प्रसाद आदि मौजूद रहे।