आगरालीक्स…नन्हें से बच्चे के आने पर तो खुशी होनी चाहिए फिर नई मां का मन विचलित क्यों है ? आगरा की डाॅ. नीहारिका मल्होत्रा से जानिए पोस्टपार्टम डिप्रेशन के बारे में और इसे कम करने के 10 टिप्स
जब एक नन्हे मेहमान की किलकारी गूंजती है तो परिवार में खुशियां आती हैं, मां के लिए तो ये खुशी सबसे ज्यादा होती है, लेकिन कई माओं के लिए यह चिंता, बेचैनी और अवसाद की वजह बन जाता है। ऐसी स्थिति को पोस्टपार्टम डिप्रेशन कहते हैं। नई मां इस गंभीर मानसिक स्थिति का शिकार हो जाती हैं। मल्होत्रा नर्सिंग एंड मैटरनिटी होम कीं निदेशक और फाॅग्सी यंग टेलेंट कमेटी कीं चेयरपर्सन डाॅ. नीहारिका मल्होत्रा बता रही हैं, क्या है पोस्टपार्टम डिप्रेशन और कैसे इसे कम किया जा सकता है।
डाॅ. नीहारिका बताती हैं कि पोस्टपार्टम डिप्रेशन एक मानसिक स्थिति है जो आपको नकारात्मक बना सकती है। इसमें नई मां चिंताओं, उदासी से घिर सकती है। यह गर्भावस्था के दौरान या बच्चे के जन्म के एक साल बाद तक शुरू हो सकती है। शुरूआत में यह मामूली तनाव या थकावट जैसा लगता है, गर्भावस्था के दौरान उदासी या निराशा भरी भावनाओं का अनुभव होने लगता है। दैनिक कार्य प्रभावित होने लगते हैं। भावनात्मक अस्थिरता, होर्मोनल परिवर्तन समेत इसके कई कारण हो सकते हैं।

इन 10 तरीकों से इसे कम कर सकते हैं
- पहले तो यह स्वीकार करें कि यह है, अगर आपको थकान महसूस होती है, अत्यधिक नींद आती है, नवजात के साथ अलगाव होता है, जरूरत से ज्यादा गुस्सा आता है तो तुरंत अपने चिकित्सक से संपर्क करें।
- इससे लड़ने के लिए अच्छा खाएं, संतुलित आहार लें, भरपूर पोषण लें, गाजर, सेब, अंकुरित अनाज, मेवा, अखरोट और बादाम अधिक खाएं।
- प्रसवोत्तर अवधि अपनी काया में लौटने का समय होता है, लेकिन दुख की बात है कि समय की कमी, मनोरंजन के अभाव और अकेलेपन का अहसास समस्या को बढ़ाता है। जिम्मेदारी को बांटें और अत्यधिक सोच-विचार न करें।
- अच्छी नींद लें। रात में आठ घंटे की नींद पूरी करें। दोपहर में भोजन के बाद 40 मिनट का आराम मददगार हो सकता है। इससे कोलेजन बनता है और बढ़ती आयु के असर को कम करता है। नई कोशिकाओं को पुनः उत्पन्न करता है। इससे आपके चेहरे और त्वचा पर भी निखार आता है।
- नवजात शिशु की बेहतर देखभाल के साथ अपने शौक बढ़ाने लिए भी 15 से 30 मिनट तक समय निकालें। जैसे पेंटिंग करना, पढ़ना, संगीत सुनना। यह मांसपेशियों को आराम देता है और आपकी रिकवरी में मदद करता है।
- अपने आप से प्यार करें, खुद की देखभाल को समय दें, नारियल के तेल, बादाम के तेल, कुछ ऐलोवेरा जैल की मदद से अपनी खूबसूरती को वापस पाने की कोशिश करें।
- पारंपरिक मालिश कराने से भी शरीर को आराम मिलता है।
- किसी से बात करें, अपने अहसासों को साझा करें। ऐसे समूहों में शामिल हों जो नई मांओं के लिए सहायक होते हैं, उन्हीं के लिए होते हैं।
- लैवेंडर, कैमोमाइल, लेमनग्रास आदि के जरिए सुगंध चिकित्सा भी आज काफी लोकप्रिय है। इसके अपने आप में अलग फायदे हैं।
- शराब, तंबाकू जैसी लतों से दूर रहें, बल्कि इनसे दूरी बनाकर अपना ध्यान योग, मेडिटेसन, व्यायाम में लगाएं।
