आगरालीक्स…आगरा में बिना सर्जरी खोला आंत का रास्ता, बची मरीज की जान. उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल के डॉक्टर अनिमेष ने किया नई चिकित्सा विधि से सफल इलाज
उजाला सिग्नस रेनबो हॉस्पिटल में बिना सर्जरी के पेट और छोटी आंत के बीच अवरुद्ध रास्ता खोलकर मरीज की जान बचाई गई। नई एंडोस्कोपिक विधि से इलाज के बाद मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है। यह आगरा मंडल में इस तकनीक से इलाज का पहला मामला है। आगरा निवासी 22 वर्षीय शिवांगी ने गलती से हार्पिक पी लिया था। इसके कुछ दिन बाद उसे खाना खाने के बाद पेट में भारीपन और उल्टियां होने लगीं। पिछले तीन महीनों से खाना खाने के आधे घंटे बाद ही वह उल्टी के जरिये बाहर निकल जाता था। इससे शिवांगी का शरीर कमजोर हो गया। कई अस्पतालों में दिखाने पर उसे दिल्ली जाने की सलाह मिली। हॉस्पिटल के गैस्ट्रोएंटरोलॉजिस्ट डॉ. अनिमेष गुप्ता ने बताया कि जांच में पाया गया कि पायलोरस (वह वाल्व जो पेट से खाना छोटी आंत में जाने देता है) पूरी तरह सिकुड़ गया था। उसमें सिर्फ पेंसिल की नोक के बराबर रास्ता बचा था, जिससे खाना छोटी आंत तक नहीं पहुंच पा रहा था। डॉ. गुप्ता ने एंडोस्कोपी के जरिए सीआरई बैलून डाइलेटेशन नामक नई तकनीक का इस्तेमाल किया। एंडोस्कोप को पायलोरस के पास ले जाया गया। डाई के माध्यम से अवरुद्ध रास्ते का पता किया। इसके बाद एंडोस्कोप के जरिए धागे के ऊपर सीआरई बैलून चढ़ाकर उस रुकावट के बीच ले गए। सीरिंज से इसे एक मिनट तक फुलाया। इसके बाद बैलून को निकाल लिया। इस तरह अवरुद्ध रास्ता खुल गया। आमतौर पर ऐसे मामले में पेट खोलकर सर्जरी की जाती है। इससे रिकवरी में समय लगता है और इलाज पर खर्च भी अधिक आता है। मरीज अब पूरी तरह स्वस्थ है।