आगरालीक्स…आगरा के श्रीमथुराधीश जी महाराज मंदिर में आज मनाया अक्षय तीज उत्सव. ठाकुर जी का चंदन मिश्रित हुआ श्रृंगार, हल्के सूधी परिधान कराए धारण
यमुना किनारा स्थित श्रीठाकुर मथुराधीश जी महाराज के मंदिर में आज अक्षय तृतिया का उत्सव भक्तिभाव के साथ आयोजित किया गया। ठाकुर जी का चंदन मिश्रित श्रंगार व हल्के सूती परिधान धारण कराए गए। मंदिर में कथा के माध्यम से भक्तों को बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा में पुरुषोत्तम मास के दौरान आने वाली अक्षय तृतीया का महत्व अत्यंत विशेष माना गया है। यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि प्रभु-सेवा, भक्ति, शीतलता और अक्षय कृपा का दिव्य अवसर है। वैशाख शुक्ल तृतीया, जिसे आखा तीज भी कहा जाता है, पुष्टिमार्ग में चंदन यात्रा के शुभारंभ का दिन माना जाता है। इसी दिन से ठाकुरजी की ग्रीष्मकालीन सेवा आरंभ होती है। गर्मी के मौसम में प्रभु को शीतलता प्रदान करने हेतु श्री मथुराधीश महाराज या बालकृष्ण स्वरूप को चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर और सुगंधित द्रव्यों का लेप अर्पित किया जाता है। सफेद अथवा हल्के रंगों के वस्त्र, मोती-माणिक्य के कोमल आभूषण और सुगंधित वातावरण के माध्यम से ठाकुरजी का मनोहारी श्रृंगार किया जाता है। पुष्टिमार्ग में इस सेवा का मूल भाव है कि प्रभु सुख ही परम धर्म है। भक्त अपने आराध्य को ग्रीष्म ताप से राहत देकर आत्मिक शांति और विरहाग्नि से मुक्ति का अनुभव करता है। कुछ परंपराओं में अक्षय तृतीया को श्रीनाथजी के पाटोत्सव अथवा प्राण-प्रतिष्ठा दिवस के रूप में भी स्मरण किया जाता है। पुरुषोत्तम मास स्वयं भगवान श्रीकृष्ण और श्रीविष्णु को समर्पित पवित्र मास माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस मास में किया गया जप, तप, दान, सेवा, कथा-श्रवण और भक्ति “अक्षय फल” प्रदान करती है, अर्थात ऐसा पुण्य जो कभी क्षीण नहीं होता। मंदिर के महन्त नन्दन श्रोत्रिय ने शयन आरती की। इस अवसर पर मुख्य रूप से लव कुमार अग्रवाल, लक्ष्मी गोयल, पद्मिनी ताजमहल, यमुना सेवक बृज खंडेलवाल, जुगल श्रोत्रिय आदि उपस्थित थे।प्रमुख पुष्टिमार्गीय अनुष्ठान
चंदन मिश्रित श्रृंगार एवं उष्णकाल सेवा का शुभारंभ
सफेद एवं हल्के वस्त्रों से ठाकुरजी का शीतल श्रृंगार
फव्वारे, गुलाबदानी और सुगंधित जल से वातावरण को शीतल बनाना
दूध, दही, फल, सत्तू, आम एवं शीतल सात्विक भोग अर्पित करना