आगरालीक्स…आगरा में श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में भक्ति और अध्यात्म का संगम, द्वितीय दिवस कुंती स्तुति और भीष्म भक्ति प्रसंग से भावविभोर हुए श्रद्धालु
यमुना नदी तट पर ब्रज की प्राचीन पहचान अग्रवन इन दिनों भक्ति के दिव्य रंग में रंगा हुआ है। ताज व्यू गार्डन फेस 1 पार्किंग एरिया, यमुना किनारा रोड पर श्री मनःकामेश्वर मंदिर मठ के श्रीमद्भागवत ज्ञान यज्ञ में कथा मंडपम की अलौकिक सज्जा, द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शन, विशाल कमल पर विराजित श्रीनाथजी का स्वरूप और संध्या बेला में यमुना आरती श्रद्धालुओं को अद्भुत आध्यात्मिक आनंद दे रही है। द्वितीय दिवस कथा में कुंती स्तुति, भीष्म भक्ति और शुकदेव प्राकट्य प्रसंग ने श्रोताओं को भक्ति और ज्ञान के रस में डुबो दिया।कथा व्यास श्री महंत योगेश पुरी ने कहा कि भक्ति का आधार ज्ञान नहीं, भाव है। भक्त को सबसे अधिक आवश्यकता निष्कपट भाव की होती है। सनातन धर्म में भगवान बाहरी वैभव नहीं, मन की सच्ची श्रद्धा देखते हैं। उन्होंने कहा कि भाव ही वह सेतु है जिससे भक्त का बेड़ा पार होता है। उन्होंने कहा कि आज घर-घर में लड्डू गोपाल विराजमान हैं, किंतु उनकी सेवा का विधि-विधान बहुत कम लोग जानते हैं। यदि घर में ठाकुरजी को विराजित करें, तो उनकी सेवा भी पूरी श्रद्धा और नियम से करें। अपनी सुविधा के अनुसार नहीं, शास्त्रानुसार सेवा करनी चाहिए।
श्री महंत योगेश पुरी ने श्रीनाथजी के स्वरूप का वर्णन करते हुए उनके नयन और नाक की तुलना नौका से की। कानों में पुष्प, गले में वैजयंती माला और हाथ में बांसुरी का मनोहारी रूप भक्तों को भक्ति में डुबोता है। उन्होंने सगुण और निर्गुण ईश्वर की चर्चा करते हुए कहा कि जो प्रत्यक्ष दिखाई देता है वह सगुण है, और जो भीतर आत्मा स्वरूप में है वह निर्गुण है।
भीष्म की भक्ति से भगवान भी हुए वश
कथा में भीष्म पितामह प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने कहा कि भक्त के वश में स्वयं भगवान होते हैं। श्री कृष्ण ने महाभारत में शस्त्र न उठाने का संकल्प लिया था, किंतु भीष्म की भक्ति और प्रतिज्ञा के कारण उन्हें वह संकल्प तोड़ना पड़ा। यही भक्ति की महिमा है।
राजा परीक्षित जन्म प्रसंग में उन्होंने बताया कि गर्भ में रक्षा करने वाले श्रीकृष्ण को खोजने की जिज्ञासा के कारण उनका नाम परीक्षित पड़ा। ईश्वर की कृपा से ही शरीर की प्रत्येक इंद्रिय कार्य करती है।
धर्म, प्रकृति और सृष्टि का गूढ़ रहस्य
कथा व्यास ने कहा कि पृथ्वी जब भगवान को पुकारती है तो गाय का स्वरूप धारण करती है, इसलिए गाय को मां कहा गया है। उन्होंने कलियुग के पांच स्थानों का वर्णन किया तथा श्रृंगी ऋषि द्वारा परीक्षित को दिए श्राप का प्रसंग सुनाया।
उन्होंने कहा कि पर्वत भगवान की हड्डियां हैं, बादल उनका तेज, पीठ में धर्म का वास और ब्राह्मण भगवान का मुख हैं। क्षत्रिय भुजाएं, वैश्य उदर और शूद्र चरण हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड ईश्वर का विराट स्वरूप है।
प्रातः आयोजित बाल संस्कार शिविर में पतंजलि योगपीठ से जुड़े त्रिलोकी बंसल एवं उमेश बंसल ने 100 से अधिक लोगों को योगाभ्यास कराया। गीता परिवार आगरा मंडल के राजीव गुप्ता पार्थ ने श्री मनकामेश्वर मंदिर बाल विद्या मंदिर के बच्चों को गीता पाठ कराया। अनामिका वर्मा ने एक्रेलिक आर्ट सिखाई। प्रतिदिन करीब 250 से अधिक बच्चे शिविर में भाग लेकर संस्कारों की शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
दैनिक यजमानों ने किया व्यास पूजन
मठ प्रशासक हरिहर पुरी और दैनिक यजमान के रूप में सोनू गुप्ता, सीमा गुप्ता, सुमित मित्तल, उर्वशी मित्तल, विनोद गुप्ता, सरोज गुप्ता, अमर गुप्ता एवं रोमी गुप्ता ने व्यास पूजन किया। कथा मंडपम में आने वाले श्रद्धालुओं ने भी गौ पूजन कर कथा श्रवण का लाभ प्राप्त किया।
प्रत्येक संध्या यमुना महारानी की आरती
मठ प्रशासक हरिहर पुरी ने बताया कि आयोजन ब्रज की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन के उद्देश्य से किया जा रहा है। प्रतिदिन कथा के पश्चात यमुना नदी की प्रतीकात्मक आरती की जा रही है। यह दृश्य कथा मंडपम को और अधिक आध्यात्मिक बना देता है। उन्होंने बताया कि आयोजन की व्यवस्थाएं हितार्थ परिवार द्वारा संभाली जा रही है।