आगरालीक्स…बच्चों ने धूल मिट्टी में खेलना बंद कर दिया है, इम्युनिटी पावर कम हो रही है. इससे बच्चों में एलर्जिक अस्थमा, पेट की बीमारी, चर्म रोग बढ़ गए हैं. आगरा में दो दिन बाल रोग विशेषज्ञ एलर्जी के कारण, बचाव और इलाज पर करेंगे मंथन
वर्तमान में बच्चों में एलर्जी संबंधित विभिन्न रोगों की शिकायतों में निरंतर वृद्धि हुई है। जिसमें सांस, पेट और त्वचा संबंधित एलर्जिक रोग प्रमुख हैं। एलर्जिक रोगों के कारण, बचाव और उपचार पर मंथन करने के लिए देशभर के बाल रोग विशेषज्ञ ताजनगरी में एकत्र हो रहे हैं। अस्थमा सहित एलर्जिक रोगों पर कॉन्फ्रेंस में पैनल डिस्कशन, टॉक और डिबेट होगी। इंडियन एकेडमी ऑफ़ पीडियाट्रिक्स आगरा के तत्वाधान में दो दिवसीय कॉन्फ्रेंस मिड टर्म पीईडी ऑल ईआर कॉन-2026 (MID TURM PED ALL ER CON-2026) का आयोजन 9 और 10 मई को हरीपर्वत स्थित होटल होलीडे इन में किया जा रहा है।कॉन्फ्रेंस के संदर्भ में जानकारी देने के लिए बुधवार को होटल भवना क्लार्क इन में आयोजन समिति द्वारा पोस्टर विमोचन समारोह का आयोजन किया गया। पोस्टर का विमोचन चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. आरएन द्विवेदी, डॉ. प्रदीप चावला, आईएपी आगरा के अध्यक्ष डॉ, संजीव अग्रवाल ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राहुल पैंगोरिया, फाइनेंस सेक्रेटरी डॉ. स्वाति द्विवेदी द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।
इस अवसर पर चीफ ऑर्गेनाइजिंग चेयरमैन डॉ. आरएन द्विवेदी और ऑर्गेनाइजिंग सेक्रेटरी डॉ. राहुल पैंगोरिया ने बताया कि बच्चों में एलर्जिक रोगों की शिकायतों में निरंतर इजाफा हो रहा है।
ये रहे मौजूद
पोस्टर विमोचन समारोह में डॉ. राजीव कृषक, डॉ. आर एन शर्मा, डॉ. राकेश भाटिया, डॉ. संजय सक्सेना, डॉ. अरुण जैन, डॉ. नीरज यादव, डॉ. पंकज कुमार, डॉ. सोनिया भट्ट, डॉ. अश्वनी यादव, डॉ. अतुल बंसल, डॉ. अभिषेक गुप्ता मौजूद रहे।
एलर्जी के मुख्य प्रकार और लक्षण
श्वसन एलर्जी: छींक आना, नाक बंद होना या बहना, आंखों में खुजली और पानी आना।
त्वचा एलर्जी: त्वचा पर लाल, खुजलीदार चकत्ते, जो अक्सर सूखे और पपड़ीदार होते हैं।
खाद्य एलर्जी : दूध, अंडे, मूंगफली या गेहूं के सेवन के बाद पेट दर्द, उल्टी, या सूजन होना।
अस्थमा: सांस लेने में घरघराहट, सीने में जकड़न और लगातार खांसी, विशेषकर खेलने के बाद।
आनुवंशिकी: यदि माता-पिता को एलर्जी है, तो बच्चों में इसके होने की संभावना अधिक होती है।
पर्यावरण: धूल के कण, पालतू जानवरों की रूसी, पराग और फफूंद प्रमुख कारण हैं।
कीट के डंक: मधुमक्खी या अन्य कीड़ों के काटने से भी गंभीर एलर्जी हो सकती है।
बचाव और प्रबंधन
एलर्जी से बचने के लिए घर को साफ रखें, पालतू जानवरों को बेडरूम से दूर रखें और मौसमी पराग के दौरान खिड़कियां बंद रखें। खान-पान पर ध्यान रखें। एलर्जी विशेषज्ञ से जांच करवाएं। 4-6 महीने तक स्तनपान कराने से प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है और एलर्जी का खतरा कम होता है।