आगरालीक्स…राधा जी, मीरा जी का विरह तो सबको पता लेकिन कान्हा जी का विरह की कथा बहुत कम. बल्केश्वर में चल रही कथा के अंतिम दिन इंद्रेश महाराज ने कहा—जहां प्रेम हो, वहां प्रभाव नहीं प्रगट करें
विख्यात कथा व्यास आचार्य इंद्रेश उपाध्याय ने शनिवार को भागवत कथा के सातवे दिन कहा कि जहां प्रेम हो, वहां प्रभाव या ऐश्वर्य प्रगट नहीं किया जाना चाहिए। वहां केवल प्रेम ही प्रेम होता है। बल्केश्वर महादेव भक्त मंडल द्वारा पुरुषोत्तम मास में बल्केश्वर पार्क में आयोजित श्रीमद् भागवत कथा के विश्राम दिवस पर इंद्रेश जी ने ब्रजवासियों के प्रेम और वियोग की चर्चा की। उन्होंने कहा कि प्रेमी व्यक्ति अंधा गूंगा, बहरा सब हो जाता है। केवल प्रेम दिखाई देता है। उसके लिए सब कुछ प्रेम ही होता है। इंद्रेश जी ने सुनाया कि मथुरा में कंस वध के लिए जब कन्हैया मथुरा जाने लगे तो ब्रजवासियों ने उन्हें रोका। इस पर कान्हा उलाहना देते हैं कि कन्हैया तो केवल गाय चराने के लिए है, केवल गोवर्धन पर्वत उठाने के लिए है। सब कुछ करने बाद भी चोर है। जब सभी ने मथुरा जाने कान्हा को रोका तो कहा वे ब्रजवासियों को समझाते हैं कि कंस को मारने के लिए जाऊंगा, परसों तक आ जाऊंगा। इंद्रेश जी ने कहा कि राधा, मीरा बाई आदि का विरह तो कथावाचकों ने सुनाया, लेकिन कान्हा के विरह की कथा बहुत कम लोगों ने सुनायी। कान्हा भी अपनी मां, ब्रजवासियों की याद में रोते हैं।इंद्रेश जी ने कहा कि कान्हा भले ही कहीं भी गये, लेकिन वे वृंदावन से कभी बाहर जाते नहीं है। उन्होंने कहा कि 11 वर्ष 56 दिन बाद यशोदा को पता चला कि कान्हा यशोदा का नहीं, देवकी का पुत्र है। उन्होंने कहा कि कान्हा को पहले ही पता चल गया था, लेकिन उन्होंने उस छिपाया रखा। इंद्रेश जी ने कहा कि बांसुरी के आविष्कारक श्रीकृष्ण ही हैं। गाय और ब्रजवासी महिलाएं बांस से डरती थीं। तब उन्होंने उनका भय दूर करने के लिए बांस को एक हाथ में लिया, उसमें तीन छिद्र हो गया। दूसरे हाथ में लेते ही तीन छिद्र हो गए अधर पर लगाया तो सातवां छिद्र हो गया। इस प्रकार ब्रज में माधुर्य पैदा करने के लिए उन्होंने बांसुरी का निर्माण किया। उनकी अलग-अलग भंगिमाओं के अनुसार ही बांसुरी, बंशी और वेणु नाम दिए गए हैं।
श्रोताओं बह उठी अश्रु धारायशोदा के पास से मथुरा जाते समय जब उन्होंने वियोग वर्णन किया तो इंद्रेश जी स्वयं तो भावुक हो गए, बहुत से श्रोताओं के तो अश्रुओं की धारा बह उठी।
महन्त कपिल नागर अर्चित पांड्या मुख्य यजमान हरीश अग्रवाल तरूना अग्रवाल गौरी शंकर अग्रवाल आशीष गुप्ता पदम अग्रवाल राजेश अग्रवाल शिवम गोयल अजय गोयल गिरीश बंसल पार्षद मुरारीलाल गोयल आदर्श नन्दन गुप्त मीडिया प्रभारी ऋषि अग्रवाल, राजेश अग्रवाल रामनिवास गुप्ता संतोष अग्रवाल नीरज जैन भूपेन्द्र सिंह नवीन गुप्ता कैलाश चन्द नैमी चन्द मुकुन्द सिंघल भोलानाथ अग्रवाल माया देवी डौली अग्रवाल आदि मौजूद रहे।