आगरालीक्स…आगरा की लॉयर्स कॉलोनी राधाकृष्ण मंदिर में बिखरी श्रीकृष्ण बाल लीलाओं की छटा, दूध-दही और हल्दी संग झूमे श्रद्धालु. माखन चोरी और गिरिराज महिमा के भक्तिरस में डूबे श्रद्धालु
लॉयर्स कॉलोनी स्थित राधा-कृष्ण मंदिर में आचार्य नरोत्तम शास्त्री के श्रीमुख से चल रही श्रीमद्भागवत कथा के पांचवें दिन भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के उपरांत उनकी बाल एवं दिव्य लीलाओं का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया गया। कथा श्रवण के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और पूरे परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा। आचार्य नरोत्तम दास जी महाराज ने बताया कि भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के बाद संपूर्ण ब्रजधाम आनंद और उत्साह से झूम उठा था। नंद बाबा के आंगन में बधाइयों का तांता लग गया और ब्रजवासियों ने दूध, दही, माखन और हल्दी के साथ उत्सव मनाते हुए हर्षोल्लास व्यक्त किया। कथा के दौरान महाराज जी ने कहा कि भगवान का अवतार केवल दुष्टों के विनाश के लिए ही नहीं, बल्कि भक्तों को प्रेम और भक्ति का संदेश देने के लिए भी होता है।कथा में पूतना वध का मार्मिक प्रसंग सुनाते हुए उन्होंने बताया कि कंस की प्रेरणा से आई राक्षसी पूतना ने बालक कृष्ण को विषपान कराने का प्रयास किया, लेकिन भगवान ने उसका उद्धार कर उसे माता यशोदा के समान सद्गति प्रदान की। महाराज जी ने कहा कि भगवान केवल भाव के भूखे हैं। जो भी किसी भी रूप में उनके पास आता है, वे उसका कल्याण अवश्य करते हैं। इसके उपरांत गर्गाचार्य जी द्वारा भगवान श्रीकृष्ण और बलराम जी के नामकरण संस्कार का वर्णन किया गया। महाराज जी ने बताया कि भगवान के अनंत गुणों के कारण उनके अनेक नाम हैं और प्रत्येक नाम का अपना विशेष आध्यात्मिक महत्व है।
बाल कृष्ण की माखन चोरी की लीलाओं का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। महाराज जी ने कहा कि भगवान की ये बाल लीलाएं भक्त और भगवान के बीच प्रेम, सरलता और आत्मीयता का संदेश देती हैं। कथा के दौरान ब्रह्मा जी द्वारा बछड़ों और ग्वाल-बालों के अपहरण की लीला का भी विस्तार से वर्णन किया गया। इस प्रसंग के माध्यम से बताया गया कि भगवान की माया और महिमा को देवता भी पूर्ण रूप से नहीं समझ सकते। इसके पश्चात यमुना जी में कालिया नाग के उद्धार का प्रसंग सुनाया गया, जिसमें भगवान श्रीकृष्ण ने कालिया नाग के फणों पर नृत्य कर उसके अहंकार का नाश किया। नाग पत्नियों द्वारा की गई स्तुति का वर्णन सुनकर श्रद्धालु भक्ति रस में सराबोर हो गए। कथा के समापन पर आचार्य श्री नरोत्तम दास जी महाराज ने गिरिराज महाराज की महिमा का वर्णन करते हुए कहा कि गिरिराज जी की पूजा से जीवन में सुख, समृद्धि और भगवान की कृपा प्राप्त होती है। मुख्य आयोजक सीए अशोक दीक्षित और आस्था दीक्षित ने बताया कि छठवें दिन की कथा में भगवान श्रीकृष्ण का विवाह महोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं से परिवार सहित उपस्थित होकर पुण्य लाभ प्राप्त करने का आह्वान किया।