आगरालीक्स…आगरा के श्री प्रेमानिधि मंदिर में ग्वाल-बाल स्वरूप में सजे ठाकुर जी, मंदिर में प्रथम गोचारण लीला के भाव में मनाई गई गोपाष्टमी
नाई की मंडी, कटरा हाथी शाह स्थित श्री प्रेमानिधि मंदिर में चल रहे श्री पुरुषोत्तम (अधिकमास) मनोरथ उत्सव के अंतर्गत 20वें दिन गोपाष्टमी उत्सव श्रद्धा, भक्ति और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर ठाकुर श्री श्याम बिहारी (श्री बड़े गोविन्द) जी महाराज को ग्वाल-बाल स्वरूप में विशेष श्रृंगार कर प्रथम गोचारण लीला का भाव प्रस्तुत किया गया। मुख्य सेवाधारी हरिमोहन गोस्वामी ने बताया कि पुष्टिमार्गीय परंपरा के अनुसार गोपाष्टमी वह पावन दिवस है जब यशोदा मैया ने बालकृष्ण को पहली बार गायों और बछड़ों को चराने के लिए वन जाने की अनुमति दी थी। इसी भाव के अनुरूप ठाकुर जी को ग्वाल-बाल के वेश में सजाया गया। प्रभु के गाल पर काला टीका लगाया गया, कंधे पर काला कंबल धारण कराया गया, हाथ में छड़ी और कमर में बांसुरी सुशोभित की गई, जिससे उनका स्वरूप अत्यंत मनोहारी प्रतीत हो रहा था। उत्सव के दौरान गौ-सेवा और गौ-महिमा का स्मरण किया गया तथा ठाकुर जी को विशेष उत्सव भोग अर्पित किया गया। वैष्णव श्रद्धालुओं ने प्रभु के ग्वाल स्वरूप के दर्शन कर धर्मलाभ प्राप्त किया। मंदिर में गोचारण लीला से संबंधित पुष्टिमार्गीय पदों और कीर्तनों का सुमधुर गायन हुआ। विशेष रूप से "प्रथम गोचरन चले कन्हाई" जैसे पदों की प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को ब्रज की बाल लीलाओं के भाव में सराबोर कर दिया। संध्या समय विशेष दर्शन एवं बंगले में भोग का आयोजन किया गया। सेवायत सुनीत गोस्वामी ने बताया कि गोपाष्टमी उत्सव श्रीकृष्ण की प्रथम गोचारण लीला का स्मरण कराता है और पुष्टिमार्ग में इसका विशेष महत्व है। यह उत्सव गौ-सेवा, वात्सल्य और ब्रज संस्कृति के प्रति श्रद्धा का संदेश देता है। इस अवसर पर मंदिर प्रशासक दिनेश पचौरी, राजीव गुप्ता, संजीव गुप्ता, संजीव अग्रवाल, जीतू अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।