आगरालीक्स…आगरा के सोलो राइडर डा. मुकेश चौहान अयोध्या से लंका तक की 20,000 किलोमीटर दूरी बाइक से तय करेंगे. श्रीराम वन गमन पथ यात्रा की शुरू
भगवान श्रीराम की मर्यादा, त्याग और सनातन संस्कृति के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित श्रीराम वन गमन पथ यात्रा का आज शुक्रवार को सेठ पदम चंद संस्थान, खंदारी, आगरा से भव्य शुभारंभ किया गया. इस यात्रा के सोलो राइडर डॉ मुकेश चौहान ने बताया कि आज हमारे देश की सबसे गहरी और पीड़ादायक समस्या है जातिवाद. यह वह दीवार है, जो मनुष्य को मनुष्य से अलग करती है, जबकि हमारी संस्कृति ने हमेशा “वसुधैव कुटुम्बकम्” का संदेश दिया है. भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान न कभी ऊँच-नीच देखी, न जाति और न ही वर्ग. श्रीराम ने कर्म, भक्ति और मानवता को ही सर्वोच्च माना। आज जब समाज जाति के नाम पर बँट रहा है, ऐसे में यह राम वन गमन पथ यात्रा हमें जोड़ने का कार्य कर रही है.
उन्होंने राम वन गमन पथ के लगभग 200 से 300 प्रमुख स्थलों को चिन्हित किया है, जहां-जहां भगवान राम ने अपने वनवास काल में समय बिताया। इस यात्रा के माध्यम से वे उन स्थलों पर जाकर अपनी आस्था को सुदृढ़ करने तथा आत्मिक अनुभव प्राप्त करने का संकल्प रखते हैं. यात्रा संयोजक नवीन अग्रवाल ने बताया कि जैसे लाखों भक्त गोवर्धन पर्वत की सात कोस की परिक्रमा करते हैं या ब्रज की 84 कोस की यात्रा कर भगवान कृष्ण के सान्निध्य का अनुभव करते हैं, ठीक वैसे ही श्रीराम वन गमन पथ की यह यात्रा भगवान श्री राम के पदचिन्हों को स्पर्श करने का एक आधुनिक माध्यम है। अयोध्या से लंका तक की 20,000 किलोमीटर की यह सोलो राइड सनातन संस्कृति के प्रति एक नई जागृति का शंखनाद है.
इस अवसर पर आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. मुकेश गोयल ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि आज समाज में मूल्यों में आयी गिरावट ही शारीरिक और मानसिक कष्टों का मुख्य कारण बनती जा रही है यदि समाज में नैतिक मूल्यों का क्षरण होगा तो व्यक्ति का जीवन असंतुलित हो जाएगा. उन्होंने यह कामना व्यक्त की कि यह यात्रा विशेष रूप से युवाओं के भीतर मूल्यबोध का पुनर्जागरण करेगी और उन्हें अपने सांस्कृतिक मूल से जोड़ेगी. आगरा के वरिष्ठ फिजीशियन प्रोफेसर ए. के. गुप्ता ने अपने संबोधन में कहा कि पिछले कुछ वर्षों में समाज के भीतर सनातन भाव पहले की अपेक्षा अधिक प्रबल हुआ है. अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ. अनुपम गुप्ता ने बताया कि इस यात्रा की योजना सामाजिक संगठनों के सहयोग से पिछले छह महीनों से तैयार की जा रही थी.
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मनःकामेश्वर महादेव मंदिर के पीठाधीश्वर महंत श्री योगेश पुरी ने कहा कि “ब्रह्म की जिज्ञासा से ही ब्रह्म की प्राप्ति होती है”, जींजव ब्रह्म जिज्ञासा का यही वास्तविक अर्थ है । उन्होंने यह कामना की कि यात्रा के दौरान मुकेश चौहान द्वारा किया गया यह अन्वेषण इतिहास के शोधार्थियों के लिए नए शोध विषयों के द्वार खोलेगा. विश्वविद्यालय की कुलपति प्रोफेसर आशु रानी ने कहा कि भगवान राम की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक अस्तित्व को लेकर भारत ही नहीं, बल्कि विश्व स्तर पर निरंतर चर्चाएं होती रही हैं। यह यात्रा केवल राम की नहीं, बल्कि प्रत्येक भारतवासी के अस्तित्व की यात्रा है.
कार्यक्रम का संचालन सेठ पदम चंद जैन प्रबन्ध संस्थान के निदेशक प्रो ब्रजेश रावत ने किया. इस अवसर पर डॉ. शरद गुप्ता, डॉ शिखा गुप्ता, आगरा रॉयल के मनोज जादोन, जतिन अग्रवाल, रोटरी क्लब ऑफ आगरा की उप-मण्डलाध्यक्ष प्रो दीपा रावत, डॉ श्वेता चौधरी, पूजा अग्रवाल, प्रखर अग्रवाल, संचिता अग्रवाल, गोपाल, विजय कुमार, प्रदीप पुरी, प्रो बिन्दु शेखर शर्मा, प्रो भूपेन्द्र स्वरूप शर्मा, प्रो अनिल गुप्ता, प्रो एसके जैन, विश्वविद्यालय कर्मचारी संघ के महामंत्री अरविन्द गुप्ता, सुनील कपूर, डॉ बी एस चौहान, डॉ सुमंत सिंह, अमित अग्रवाल, डॉ सीपी गुप्ता, कपिल आदि उपस्थित रहे।