आगरालीक्स…आगरा में 400 करोड़ का उत्तरी बाईपास बना, फिर भी शहर से गुजर रहे ट्रक. लगातार हो रहे एक्सीडेंट. अब मानवाधिकार आयोग ने एनएचएआई को दिया 3 सपताह का अल्टीमेटम
लगभग 14 किलोमीटर लंबे और 400 करोड़ रुपये की लागत से बने उत्तरी बाईपास के चालू हो जाने के बावजूद राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या-19 से भारी वाहनों का दिन-रात शहर में प्रवेश जारी है, जिससे लगातार घातक सड़क दुर्घटनाएँ हो रही हैं और आम नागरिकों के जीवन व स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा बना हुआ है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए उत्तर प्रदेश मानवाधिकार आयोग ने आज सुनवाई के उपरांत भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को निर्देश दिया है कि वह राष्ट्रीय राजमार्ग (भूमि व यातायात) अधिनियम, 2002 की धारा-35 के अंतर्गत तीन सप्ताह के भीतर अधिसूचना जारी करे, जिससे भारी वाहनों का एनएच-19 के माध्यम से शहर में प्रवेश पूर्णतः प्रतिबंधित किया जा सके।यह आदेश सड़क सुरक्षा एक्टिविस्ट एवं वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन के प्रार्थना-पत्र पर, एनएचएआई के परियोजना निदेशक संदीप यादव को सुनने के पश्चात पारित किया गया। आयोग ने एनएचएआई को अनुपालन आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश देते हुए अगली सुनवाई की तिथि 17 मार्च 2026 नियत की है। सुनवाई के दौरान आयोग के सदस्य न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) राजीव लोचन मेहरोत्रा ने भारी वाहनों के कारण होने वाले ट्रैफिक जाम, दुर्घटनाओं और जन-हानि पर गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की और इसे मानवाधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया। एनएचएआई की ओर से बताया गया कि यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (येड़ा) द्वारा उत्तरी बाईपास के समाप्ति बिंदु पर टोल प्लाजा का निर्माण किया जा रहा है, जिसके लिए टेंडर प्रक्रिया प्रारंभ हो चुकी है। टोल शुल्क येड़ा द्वारा वसूला जाएगा, जिसे एनएचएआई व येड़ा के बीच साझा किया जाएगा।
इस कारण नहीं गुजर रहे वाहन उत्तरी बाईपास सेवर्तमान में उत्तरी बाईपास से कम वाहनों के गुजरने का प्रमुख कारण जानकारी का अभाव तथा खंदौली (आगरा) टोल प्लाजा पर अतिरिक्त टोल शुल्क है। जबकि उत्तरी बाईपास का मार्ग 38 किलोमीटर लंबा, बिना किसी रुकावट के सुरक्षित मार्ग है, वहीं एनएच-19 से होकर जाने पर दूरी भले ही 34 किलोमीटर हो, परंतु लाल बत्तियाँ, चैराहे और बार-बार लगने वाले जाम यात्रा को जोखिमपूर्ण बना देते हैं। शहर से लगभग 1,50,000 वाहन प्रतिदिन गुजरते हैं जो न केवल प्रदूषण उत्पन्न करते हैं बल्कि शहर के निवासियों के लिए सड़क सुरक्षा को लेकर बड़ा प्रश्न चिन्ह लगा देते हैं। प्रशासन द्वारा भारी वाहनों को डायवर्ट करने के प्रयास किए गए, किंतु ठोस कानूनी अधिसूचना के अभाव में शहर में उनका प्रवेश नहीं रुक सका।
उल्लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने 30 दिसंबर 1996 के आदेश में बाईपास निर्माण का निर्देश दिया था ताकि भारी वाहनों का शहर में प्रवेश रोका जा सके। पुनः 07.08.2006 को बाईपास निर्माण की स्थिति रिपोर्ट तलब की गई। लंबी देरी के बाद अंततः 04 दिसंबर 2025 को उत्तरी बाईपास चालू हो सका। इसी प्रकार, दिल्ली में भी सुप्रीम कोर्ट ने 16.12.2015 के आदेश द्वारा बिना लोड-अनलोड वाले भारी वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई थी। एनएच-19 के दोनों ओर घनी आवासीय कॉलोनियाँ, विद्यालय, अस्पताल और प्रमुख पर्यटन स्थल स्थित हैं, जहाँ से भारी वाहनों का गुजरना जन-जीवन के लिए अत्यंत खतरनाक है।
वरिष्ठ अधिवक्ता केसी जैन ने कहा कि “मानवाधिकार आयोग का यह आदेश केवल एक प्रशासनिक निर्देश नहीं, बल्कि आम नागरिक के जीवन, स्वास्थ्य और स्वच्छ पर्यावरण के अधिकार की रक्षा की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है। मुझे पूर्ण विश्वास है कि इस निर्णय से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश रुकेगा, सड़क दुर्घटनाओं में कमी आएगी और आगरा की वायु गुणवत्ता में भी उल्लेखनीय सुधार होगा।”