आगरालीक्स..(Agra 3rd June) आगरा मेंं मेट्रो के हाई स्पीड निर्माण कार्य पर रोक लग गई है। अनापत्ति प्रमाण पत्र न मिलने से ताजमहल, आगरा किला और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन की टेंडर प्रक्रिया अधर में अटक गई है।
आगरा में पहले चरण में ताजमहल, आगरा किला और जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन बनाए जा रहे हैं। इसके लिए राष्र्टीय स्मारक प्राधिकरण से अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया गया लेकिन अभी तक अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं मिला है। इससे इन तीनों मेट्रो स्टेशन के लिए टेंडर जारी नहीं हो पा रहे हैं। इस मामले में कुमार केशव प्रबंध निदेशक यूपीएमआरसी का कहना है कि सीएम के सामने अपनी बात रखी है, जल्द क्लेयरेंस मिलने की उम्मीद है।
तीनों स्टेशन होंगे भूमिगत
ताजमहल, आगरा किला और जामा मस्जिद, ये तीनों भूमिगत मेट्रो स्टेशन होंगे। इसके लिए सुरंग खोदी जाएगी, क्योंकि तीनों मेट्रो स्टेशन संरक्षित स्मारकों के पास हैं, इसलिए एनओसी मांगी गई है। लेकिन एनओसी नहीं मिल पा रही है।
एलीवेटेड स्टेशन के लिए पहला डबल टी गर्डर तैयार
यूपीएमआरसी के प्रबंध निदेशक कुमार केशव ने यूपीएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने कहा कि प्रीकास्ट डबल टी गर्डर से आगरा मेट्रो के प्रयोरिटी कॉरिडोर में तीनों ऐलिवेटिड स्टेशन ताज ईस्ट गेट, बसई एवं फतेहाबाद रोड के निर्माण में सही गुणवत्ता के साथ गति आएगी। इसके साथ ही आगरा मेट्रो की टीम की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यूपीएमआरसी आगरा की जनता को निर्धारित समय में विश्वस्तरीय मेट्रो सेवा देने के लिए प्रतिबद्ध है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश मेट्रो रेल कॉरपोरेशन, कानपुर मेट्रो के बाद आगरा मेट्रो में भी कॉन्कोर्स लेवल के निर्माण लिए ‘डलब टी गर्डर का प्रयोग करेगा। बमरौली कटारा स्थित कास्टिंग यार्ड में पहला डबल टी गर्डर बनकर तैयार हो गया है। यह गर्डर अग्रेजी भाषा के अक्षर ‘टी’ के जोड ‘ जैसा दिखता है, इसलिए इसको डबल टी गार्डर कहा जाता है। आगरा मेट्रो में प्रयोग होने वाले डबल टी गर्डर की चौड़ाई 3.7 मीटर व लंबाई 11 मीटर होगी। इसके साथ ही इस गर्डर का वजन लगभग 33 टन होगा।
गौरतलब है कि पहले ऐलिवेटिड स्टेशनों के निर्माण में साइट पर ही शटरिंग लगाकर कॉन्क्रीट से कॉन्कोर्स का निर्माण किया जाता था, जिसमें समय व लागत दोनों अधिक लगती थी और निर्माण स्थल के आस-पास यातायात प्रबंधन भी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन डबल टी गर्डर के प्रयोग से ऐसी कोई परेशानी नहीं होती। डबल टी गर्डर को कास्टिंग यार्ड में तैयार करके सीधे साइट रख दिया जाता है जिससे समय व बचत के साथ ही राहगीरों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।