आगरालीक्स…तुम्हें सजदे किए दिल ने मगर तू बेवफा निकला…आगरा में मिस्र की शायरा वला जमाल संग मुमताज नसीम, राजवीर राज, फलक ने बांधा समां…शायरों की जुटी महफिल
मिस्र की शायरा वला जमाल संग जब भारत के जाने माने शायरों की महफिल रोशन हुई तो शेर और नग्मों का ऐसा सिलसिला छिड़ा कि हर दिल में छाप छोड़ गया। मिस्र से यी शायरा वला जमाल ने तुझे सजदे किए दिल ने मगर तू बेवफा निकला, जैसे सपनों की बस्ती में वफाओं का खंडहर निकला… प्रस्तुत की।
मुमताज नसीम ने आज इकरार कर लिया हमने, याद को बीमार कर लिया हमने, अब तो लगता है जान जाएगी, तुमसे जो प्यार कर लिया हमने… रचना प्रस्तुत की।
राजवीर राज ने हमने बहुत सम्भाल कर रखा था फासला, तुम रू-ब-रू हुए तो इरादा बदल गया… शायरी प्रस्तुत की।
रंजीता सिंह (फलक) ने वो मेरे बाद किसी और को क्यों चाहेंगे, मैंने हर लम्हा उनसे ही मोहब्बत की है…, अंधेरो भूल जाओ उसे गुमराह करना, वो हथेली पर सूरज लेकर चलता है…, रचना प्रस्तुत की।
निधि गुप्ता (कशिश) ने दो बिछड़े प्रेमियों को देखकर ये जान पाई मैं, मकां एक खंडहर में कैसे तब्दील होता है, न था उजड़ा घर ही न वीरानी मुकद्दर में… मैं तेरे वास्ते दुनिया से लड़ भी सकती हूं, बस इतना रख मेरा हाथ थाम तो रख…, प्रस्तुत की।
आलोक (अविरल) ने हमें खबर ही नहीं, कमाल थे हम भी, पता चला है किसी का खयाल ते हम भी…रचना प्रस्तुत की। आलोक यादव ने जिस दिन से तुम चले गए रिश्ते समेट कर, उस दिन से गांव में कोई मेला नहीं लगा… रचना प्रस्तुत की।