आगरालीक्स…आगरा में वायु प्रदूषण बढ़कर फिर न घटा, ढाई महीने से मॉडरेट बना हुआ है और इसका असर अब अस्पतालों में सामने आने लगा है
आगरा में लंबे समय से वायु प्रदूषण मध्यम यानि मॉडरेट बना हुआ है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है, क्योंकि यह अस्थमा, हृदय रोग, स्ट्रोक और फेफड़ों के कैंसर जैसी बीमारियों के खतरे को बढ़ाता है। खासकर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को अधिक प्रभावित करता है। फिलहाल आगरा में इसका असर ह्दय और सांस रोगियों पर दिखने लगा है। सरकारी और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों की संख्या बढ़ रही है।
आगरा में वायु प्रदूषण का स्तर अभी भले ही बहुत खराब न दिखे, लेकिन लंबे समय तक मध्यम स्तर की खराब वायु भी अदृश्य रूप से अंगों को नुकसान पहुंचा रही है। आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज में सांस रोगों की ओपीडी नवंबर तक जहां 200 मरीजों की चल रही थी वहीं अब दिसंबर में आकर यह 300 के करीब पहुंच गई है। चिकित्सक इसे लंबे समय तक मध्यम स्तर की खराब वायु गुणवत्ता के कारण मान रहे हैं।
एसएन मेडिकल कॉलेज में टीबी एंड रेस्पिरेटरी विभाग के डॉ. संतोष कुमार बताते हैं कि लंबे समय तक मध्यम वायु प्रदूषण के प्रभाव सांस की कई समस्याएं पैदा करते हैं। इसमें अस्थमा और सीओपीडी को बढ़ाना, श्वसन संक्रमण का खतरा, अस्थमा के अटैक, सांस फूलना, ब्रोंकाइटिस, ब्रोंकल अस्थमा की समस्याएं बढ़ जाती हैं। इन दिनों इस समस्याओं से परेशान होकर उनके पास ओपीडी में आने वाले मरीज अधिक हैं।
इससे बचने के लिए मरीजों को मास्क पहनने, सुबह घने कोहरे में टहलने न जाने, अधिक समय घर या दफ्तर में ही बिताने, एकदम सीधे ठंड के संपर्क में न आने, अगर दिल या सांस के पहले से रोगी हैं तो अपनी दवाएं समय से लेते रहने और चिकित्सक के परामर्श कर दवाओं को बैलेंस कराने की सलाह दी जाती है।
हृदय संबंधी समस्याओं की बात करें तो दिल के दौरे, स्ट्रोक और रक्त के थक्के बनने का जोखिम भी इन दिनों बढ़ जाता है।
कई प्रदूषक जैसे PM2.5, ओजोन अदृश्य होते हैं, जिससे लोग खतरे से अनजान रहते हैं। यह एक चिंता का कारण है। लंबे समय तक प्रदूषित हवा के संपर्क में रहने से समय के साथ अंगों को नुकसान होता है, भले ही प्रदूषण का स्तर अधिक खराब न हो।
बता दें कि आगरा में नवंबर की शुरूआत से ही वायु की गुणवत्ता मध्यम खराब स्तर की चल रही है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार यहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 150 से 200 के बीच चल रहा है। डेढ़ माह पहले इसमें एकाएक बढ़ोत्तरी हुई और फिर यह कम नहीं हुआ है।
एक्यूआई के स्तर और प्रभाव
अच्छा (0-50): स्वस्थ हवा, कोई जोखिम नहीं।
मध्यम (51-100): स्वीकार्य, संवेदनशील लोगों को सतर्क रहना चाहिए।
संवेदनशील समूहों के लिए अस्वास्थ्यकर (101-150): संवेदनशील लोगों (जैसे बच्चे, बुजुर्ग) के लिए स्वास्थ्य जोखिम।
अस्वस्थ (151-200): सभी के लिए अस्वस्थ, बीमार लोगों के लिए खतरनाक।
बहुत अस्वस्थ (201-300): सभी के लिए हानिकारक।
गंभीर (300+): गंभीर स्वास्थ्य खतरा, जीवन पर असर पड़ सकता है।
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