आगरालीक्स…भीषण गर्मी में पशु-पक्षी भी रहे बिलबिला। दोपहर में गाय, बंदर-कुत्ते पानी को तरस रहे। गर्मियों में थोड़ा इनका भी रखें ध्यान।
सुबह से ही पानी को भटकते हैं जानवर
आसमान से बरसती आग में पशु-पक्षियों का बुरा हाल हो रहा है। गर्मियों में सड़कों पर घूमने वाले गाय-बैल, कुत्ते हो या छतों पर मंडराने वाले बंदर सुबह से ही पानी के लिए इधर-उधर भटकते हैं।
कूलरों का पानी भी बंदरों को नहीं मिलता, छतें रही तप
बंदरों को पहले कूलरों में पानी मिल जाता था लेकिन अब लोगों ने बंदरों से बचाव के लिए कूलरों के चारों तरफ कांटेदार तार डलवा दिए हैं, जिससे वह पानी नहीं पी पाते। इस वजह से वह पानी की तलाश में भटकते हुए दिख जाते हैं।
जीभ निकालकर हांफते नजर आते हैं कुत्ते
गाय-बैल, कुत्ते पानी के लिए नालियों में मुंह मारते हैं लेकिन नालियां भी दोपहर के समय सूखी हुई होती हैं, जिसमें उन्हें पानी नहीं मिलता। कुत्ते जीभ निकाले हांपते हुए इधर से उधर दौड़ते नजर आ जाते हैं। दोपहर के समय तो कोई पशु-पक्षी नजर नहीं आ रहा है।
पशु-पक्षियों के लिए रखा पानी दोपहर में खौलने लगता है
इस संबंध में कुछ लोग सुबह-शाम तो पानी और दाना डाल देते हैं लेकिन दोपहर के समय इनके लिए रखा गया पानी गरम हो जाता है। टंकियों का पानी भी गरम ही आ रहा है। ऐसे में सादा पानी ही पशु-पक्षियों का बदल दिया जाए तो राहत मिल सकती है।
कुत्तों ने गर्मी से बचने को खोजा नायाब तरीका
गर्मी में सड़कों पर घूमने वाले कुछ कुत्तों ने एक नायाब तरीका खोजा है, वह दोपहर के समय कुछ घनी गलियों की नालियों में पीठ के बल लेट जाते हैं, जिससे नालियों का पानी उन्हें ठंडक पहुंचाता है और मुंह की ओर पानी भी नहीं जाता। यह नजारा मुस्लिम बाहुल्य नई बस्ती की गलियों मे देखने को मिल जाता है।