आगरालीक्स…आगरा के शारदा वर्ल्ड स्कूल में क्षमता निर्माण पर सीबीएसई द्वारा हुई कार्यशाला. “आलोचनात्मक एवं सृजनात्मक चिंतन” पर किया विचार विमर्श
शारदा वर्ल्ड स्कूल, आगरा में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा आयोजित क्षमता निर्माण की कार्यशाला का आयोजन (Capacity Building Programme) किया गया। इस कार्यक्रम का मुख्य विषय “आलोचनात्मक एवं सृजनात्मक चिंतन” था, जो आधुनिक शिक्षा प्रणाली की आत्मा कहा जा सकता है। विद्यालय के छात्र छात्राओं ने तिलक लगाकर एवं बैज लगाकर अतिथियों का स्वागत किया । छत्राओं ने मनमोहक स्वागत गीत प्रस्तुत किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के एच ओ एस सत्याकी बनर्जी एवं अतिथियों द्वारा सरस्वती मां की प्रतिमा पर माल्यार्पण कर एवं दीप प्रज्वालित कर कार्यशाला का शुभारंभ किया एच ओ एस ने प्रतीकचिन्ह प्रदान कर अतिथियों का स्वागत किया स्वागत भाषण में उन्होंने कहा कि “आज के युग में शिक्षा केवल जानकारी देने तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि विद्यार्थियों में सोचने, प्रश्न करने और नवीन समाधान खोजने की क्षमता विकसित करना ही वास्तविक शिक्षा का उद्देश्य है। सीबीएसई रिसोर्स पर्सन अरुण अग्रवाल एवं अंजलि वशिष्ठ ने शिक्षकों को संबोधित किया। सीबीएसई रिसोर्स पर्सन अरुण अग्रवाल शिक्षण प्रशिक्षण शैक्षणिक सुविधा में पेशवर हैं।

शिक्षार्थी केंद्रित शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आप उपप्रधानाचार्य शोधकर्ता और सीबीएसई के प्रशिक्षक के रूप में चिंतनशील शिक्षकों विकसित करने के लिए सीबीएसई और एन ई पी 2020 की रूपरेखा के अनुरूप प्रभावी पाठ्यक्रम कार्यान्वयन सुनिश्चित करने की दिशा में काम कर रहे हैं। अंजलि वशिष्ठ शैक्षणिक समन्वयक, उप प्रधानाचार्य, प्रधानाचार्य जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में कार्यरत रही है । आस्था समूह के स्कूलों सिटी कोऑर्डिनेटर भी है। जहां वे शैक्षणिक कार्यक्रम मार्गदर्शन करती हैं।
दो दिवसीय प्रशिक्षण में विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। सीबीएसई द्वारा नामित अनुभवी संसाधन व्यक्तियों ने शिक्षकों को यह समझाया कि कैसे कक्षा में विद्यार्थियों को ‘सोचने वाले शिक्षार्थी’ बनाया जा सकता है – जो तथ्यों को केवल रटने के बजाय उनका विश्लेषण करें, प्रश्न पूछें और रचनात्मक समाधान प्रस्तुत करें।
सत्रों के दौरान अनेक रोचक गतिविधियाँ, चर्चा समूह, विचार-मंथन अभ्यास और शिक्षण तकनीकों के प्रायोगिक उदाहरण प्रस्तुत किए गए। इन गतिविधियों ने यह स्पष्ट किया कि आलोचनात्मक चिंतन विद्यार्थियों को विवेकशील बनाता है, जबकि सृजनात्मक चिंतन उन्हें नवाचार की दिशा में प्रेरित करता है। कार्यक्रम के समापन पर प्रतिभागी शिक्षकों ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण उनके शिक्षण कार्य को और अधिक प्रभावी, रोचक और विद्यार्थी-केंद्रित बनाएगा।
अंत में विद्यालय के एच ओ एस सत्याकी बनर्जी ने सीबीएसई तथा सभी संसाधन व्यक्तियों का हार्दिक धन्यवाद ज्ञापित किया और कहा कि ऐसे कार्यक्रम शिक्षा के क्षेत्र में नई सोच और नई ऊर्जा का संचार करते हैं । इस अवसर पर विद्यालय के समन्वयक सभी शिक्षक शिक्षिकाएं उपस्थित रहे। इस अवसर पर प्रशांत गुप्ता (सीईओ शारदा ग्रुप) ने शुभकामानाये प्रेषित की ।