आगरालीक्स..अफीम, गांजा और शराब से भी घातक है मोबाइल का नशा. आगरा में ‘मोबाइल और बचपन का भविष्य’ पर हुई चर्चा
नागरी प्रचारिणी सभा आगरा द्वारा 'मोबाइल और बचपन का भविष्य' पर विचार गोष्ठी का आयेाजन किया गया. मुख्य वक्ता व मुख्य अतिथि एपीएस ग्रुप के चेयरमैन महेशचंद्र शर्मा ने कहा कि अफीम, गांजा, शराब से भी ज्यादा घातक नशा मोबाइल का है. इसका ग्राफ बढ़ता जा रहा है. मोबाइल के रेडिएशन से नजर कमजोर होकर चश्मा लग जाता है. लोटस हॉस्पिटल के चेयरमैन एवं निदेशक डॉ. अनपुम शर्मा ने कहा कि ये कैप्चरिंग है आपकी संस्कृति का. एल्गोरिदम के द्वारा एडिक्शन के द्वारा ये बिजनेस है, इसलिए इसे रोका नहीं जा सकता है.विशिष्ट वक्ता सुमन सुराना ने कहा कि वह डाइनिंग टेबल पर जाने से पहले माबाइल एक टोकरी में जमा करवाती हैं. कार्यक्रम के अध्यक्ष एवं सभा के सभापति डॉ. खुशीराम शर्मा ने कहा कि मोबाइल और बचपन का भविष्य एक दूसरे से गहराई से जुड़ गए हैं. अत्यधिक स्क्रीन समय से मानसिक स्वास्थ्य, याद्दाश्त और नींद प्रभावित हो रही है.
कार्यक्रम की शुरुआत में डॉ. ब्रज बिहारी लाल शर्मा 'बिरजू' की सरस्वती वंदना से हुआ. सभा के उपसभापति एवं कार्यक्रम संयोजक डॉ. विनोद कुमार माहेश्वरी ने स्वागत भाषण दिया. विचार गोष्ठी का सफल संचालन प्रतिष्ठित साहित्यकार नूतन अग्रवाल ने किया. अंत में सभा के मंत्री प्रो. चंद्रशेखर शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया.
इस अवसर पर टोनी फास्टर, डॉ. रमा वर्मा, डॉ. विजय तिवारी, रामेंद्र शर्मा, प्रो. अनुराग पालीवाल, डॉ. सुषमा सिंह, रमेश पंडित, डॉ. आभा चतुर्वेदी, प्रतिभा जिंदल, संजय गुप्त, शरद गुप्ता, महेश धाकड़, मनीष वर्मा, रामप्रकाश पाल, गिरधारीलाल, डॉ. सुनील दुबे, डॉ. देवी सिंह नरवार, राजीव सक्सैना, शीलेंद्र कुमार, अनिल शर्मा, प्रभुदत्त उपाध्याय, अनिल जैन, शेषपाल, राहुल चतुर्वेदी, उमाशंकर पाराशर ने भी अपने विचार व्यक्त किए.