आगरालीक्स…आगरा में थैलेसीमिया से ग्रसित 45 बच्चों और उनके पेरेंट्स के साथ इस बीमारी के लिए किया गया अवेयर. विश्व थैलेसीमिया दिवस 8 मई को. जानें कई महत्वपूर्ण जानकारियां
इंडियन अकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक एवं लोकहितम थैलेसीमिया सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में लोकहितम भवन में थैलेसीमिया से ग्रसित 45 बच्चों एवं उनके अभिभावकगणों के साथ विश्व थैलेसीमिया दिवस साप्ताहिक गतिविधि के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन लोकहितम चैरिटेबल ब्लड सेंटर, लोकहितम भवन कमला नगर आगरा पर किया गया। विश्व थैलेसीमिया दिवस के इस वर्ष का थीम है अवेयर रहे, शेयर एवं केयर – थैलेसीमिया ज्ञान में सुधार के लिए वैश्विक समुदाय के साथ काम करना। दुनिया भर में थैलेसीमिया के प्रति जागरूकता विकसित करना और बीमारी से प्रभावित लोगों की देखभाल करना इस वर्ष के आयोजन का प्रमुख उद्देश्य है। संस्था के अध्यक्ष अनिल कुमार अग्रवाल ने जागरूकता कार्यक्रम में उपस्थित अतिथिगण आईएपी के अध्यक्ष डॉ. अरुण जैन, सचिव डॉ. योगेश दीक्षित, कोषाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार मित्तल एवं वरिष्ठ चिकित्सक व पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल का परिचय कराया एवं लोकहितम थैलेसीमिया सोसाइटी के निदेशक सुनील गोयल ने सभी का पटका पहनाकर स्वागत किया।

आईएपी के अध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने थैलेसीमिया के बढ़ते मामलों एवं आंकड़ों से अवगत कराया और बताया कि थैलेसीमिया एक रक्त विकार रोग है। इसकी जागरूकता फैलाने, बीमारी से संबंधित मिथकों और रोगियों को सामान्य जीवन जीने में मदद करने के लिए 8 मई को यह दिन मनाया जाता है। सचिव डॉ. योगेश दीक्षित ने बताया कि यह दिन थैलेसीमिया बच्चों के जीवन से जुड़े सामाजिक सहयोगी रक्तदाताओं से भी संबंधित है जो निरंतर अंतराल पर इन बच्चों के लिए रक्तदान करते हैं। रोगियों की मदद करने और उन्नति लाने के लिए डॉक्टरों के प्रयासों को भी इस दिन सम्मानित किया जाता है।
कोषाध्यक्ष डॉ. विनय कुमार मित्तल ने बताया कि जिन बच्चों को थैलेसीमिया की शिकायत है उसके लिए समाज किस तरह उनकी मदद कर सकता है इस विषय पर लोगों को जागरूक किया जाना चाहिए। यह दिन उन लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए मनाया जाता है जो बीमारी के साथ जीने के लिए संघर्ष करते हैं। यह दिन थैलेसीमिया से पीड़ित सभी रोगियों और उनके माता-पिता के सम्मान में एक स्मरण दिवस है, जिन्होंने अपनी बीमारी के बोझ के बावजूद जीवन के लिए कभी उम्मीद नहीं खोई है और उन सभी वैज्ञानिकों के लिए भी जो समर्पण के साथ कड़ी मेहनत कर रहे हैं और बेहतर गुणवत्ता प्रदान करने का प्रयास कर रहे हैं।
वरिष्ठ चिकित्सक व पूर्व अध्यक्ष डॉ. सुनील अग्रवाल ने बताया कि इन बच्चों में बार-बार रक्त चढ़ाने से आयरन की ओवरडोज शरीर में बढ़ जाती है इसको कम करने के लिए इनको इंजेक्शन और ओरल मेडिसिन के माध्यम से आयरन चिलेशन थेरेपी के माध्यम से जमा हुए आयरन को कम किया जा सकता है अगर इसको समय रहते सही नहीं किया तो शरीर के अन्य भागों को भी खराब कर सकता है जिसमें लिबर प्रमुख है।
प्रबंध समिति के सदस्य भुवेश अग्रवाल ने बताया कि इन बच्चों को आजीवन हर महीने 2 से 4 यूनिट रक्त चढ़ाने की जरूरत पड़ती है जिसके लिए परिवार और उनके रिश्तेदार इस कार्य में उनकी मदद करते हैं। जागरूक कार्यक्रम करने का मकसद लोगों को थैलेसीमिया की बीमारी के प्रति जागरूक करना है और इस जागरूक कार्यक्रम से सिख लेकर वह अन्य लोगों को भी जागरूक करें एवं इस तरह के बच्चों की बढ़-चढ़कर मदद करें।
समन्वयक रोहित अग्रवाल एडवोकेट ने बताया कि इन बच्चों की लाइफ अनिश्चित होती है और सही समय पर इन्हें सही इलाज मिल जाए तो इनकी उम्र बड़ाई जा सकती है। लोकहितम निरंतर रूप से थैलेसीमिया सुविधाओं के विस्तार हेतु कार्य कर रही है एवं जून माह से समस्त थैलेसीमिया बच्चों के लिए रक्त की गुणवत्ता को उच्च बनाने हेतु फेनोटाइप टेस्ट की भी शुरुआत करने जा रही है जो कि इन बच्चों की उम्र बढ़ाने, ब्लड ट्रांसफ्यूजन कम करने आदि में सहायक होगी।