आगरालीक्स…बुजुर्गों को युवाओं से अलग देखभाल की जरूरत है, इसके लिए हर साल 100 जेरिएट्रिशियन तैयार हो रहे हैं, आगरा से कनेक्शन, प्रेक्टिसनर्श, दवाओं की डोज, शैड्यूल, सपोर्ट, कॉम्बिनेशन सब यहां हो रहा तय
आगरा। देश में बुजुर्गों (60 से अधिक वर्ष के लोग) की संख्या लगभग 15 करोड़ है। जिनकी स्वास्थ सुविधाओं के लिए कम से कम 10 हजार जीरिएट्रिक एक्पर्ट की जरूरत है, जबकि हैं सिर्फ 3-4 हजार। 2050 में भारत में हर पांच व्यक्ति में एक बुजुर्ग होगा। ऐसे में बड़ी संख्या में ऐसे डॉक्टर चाहिए जो बुजुर्गों की देखभाल के पारंगत हों। आगरा इस पहल का एक अहम हिस्सा है।
जेरिएट्रिक सोसायटी ऑफ इंडिया (GSI) द्वारा डॉक्टरों के प्रशिक्षण के संबंध में आगरा मुख्यालय की तरह काम कर रहा है। आगरा के डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ इस संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। उन्होंने बताया कि विगत चार वर्षों से सोसायटी हर साल 100 ऐसे डॉक्टर तैयार कर रही है जो बुजुर्गों की देखभाल में पारंगत हों। जीएसआई जीरिएट्रिक में ऑनलाइन व ऑफलाइन कोर्स करवा रहा है। इसमें दो एक्सपर्ट डॉक्टर प्रशिक्षण देते हैं। आनलाइन एग्जाम के बाद प्रेक्टिकल के लिए आगरा बुलाया जाता है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कोर्स से संबंधित प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
इस तरह जेरिएट्रिक मेडिसिन में सर्टिफिकेट कोर्स संचालित किया जाता है, जिसके माध्यम से स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों को प्रशिक्षित किया जाता है। सोसायटी अकेले हर साल ठीक 100 डॉक्टर तैयार कर रही है। इतना ही नहीं विशेषज्ञ चिकित्सकों, स्वास्थ्य पेशेवरों की निगरानी में बुजुर्गों के लिए उनकी जरूरत के हिसाब से दवाओं की डोज, शैड्यूल, सपोर्ट, कॉम्बिनेशन निर्धारित या उसमें बदलाव किया जाता है।
शारीरिक और मानसिक दशा को देखते हुए इलाज होना चाहिए
देश में 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोग अल्जाइमर, हृदय रोग, सांस रोग और अवसाद (एकाकी जीवन के कारण) जैसी मल्टीप्ल बीमारियों से जूझ रहे हैं। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अतुल कुलश्रेष्ठ ने बताया कि बुजुर्गों का इलाज वयस्क मरीजों से अलग होता है, इसलिए उनकी शारीरिक और मानसिक दशा को देखते हुए इलाज होना चाहिए।
ऑनलाइन व ऑफलाइन कोर्स की जरूरत क्यों ?
वृद्धावस्था की समस्याएं और इलाज दोनों युवावस्था से अलग हैं। याददाश्त और मांसपेशियों की कमजोरी के साथ शारीरिक क्षमता घटने लगती है। जिसमें इलाज से साथ देखभाल की अधिक जरूरत होती है। यही वजह है कि जीएसआई जीरिएट्रिक में ऑनलाइन व ऑफलाइन कोर्स करवा रहा है।
क्या कहती है डब्यूएचओ की गाइड लाइन ?
डब्ल्यूएचओ व यूएनआई ने 2021-2030 तक 10 वर्ष में सभी देशों के लिए केयर ऑफ एल्डरली पॉप्यूलेशन के लिए गाइड लाइन जारी की, जिसमें वृद्धाश्रमों में दवा, पूजा, खाने के अलावा सम्पूर्ण व्यवस्था होनी चाहिए। जबकि ज्यादातर वृद्धाश्रमों में बुजुर्गों को सिर्फ आराम दिया जा रहा है जिससे वह खुद को अकेला और अवसाद में महसूस कर रहे हैं।
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