आगरालीक्स…जैसे लोगों के साथ रहोगे, वैसी ही बुद्धि हो जाती है. अश्वथामा का उदाहरण देकर आगरा में कथा व्यास मृदुल कांत शास्त्री ने श्रीमद्भागवत कथा में की सुमति और कुमति की व्याख्या
जैसी संगति वैसी बुद्धि। सज्जन लोगों की संगति सुमति और दुर्जन लोगों की संगति कुमति है। शिव पुराण के अनुसार अश्वत्थामा शिवजी का पांचवा अवतार था। परन्तु कौरवों की संगति के कारण उसने ऐसे-ऐसे कर्म किए मुक्ति नहीं मिली। कुसंग का प्रभाव था कि अश्वथामा सिर में घाव लिए भटक रहा है। अश्वत्थामा के प्रसंग के माध्यम से आज श्रीहरि सत्संग समिति द्वारा विजय नगर स्थित स्पोर्टबज में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में आज दूसरे दिन कथा व्यास पूज्यश्री मृदुल कान्त शास्त्री ने संगति के प्रभाव को समझाया।
कहा कि जैसे लोगों के साथ रहोगे बैसी ही बुद्धि हो जाती है। इसलिए अच्छे लोगों की संगत में रहे। जीवन आपका है इसलिए जीवन में क्या करना है, इसका निर्णय लेने का अधिकार भी आपको है। आप क्या करते हैं इस पर आपके अलावा किसी का अधिकार नहीं। इसलिए अच्छे कर्मों और अच्छी संगति के प्रति आसक्त रहें। कथा व्यास पूज्यश्री मृदुल कान्त शास्त्री ने कहा कि दुनिया का सबसे बड़ा मंत्र विश्वास है। ईश्वर के प्रति भक्त का विश्वास एक दिन उसकी इच्चा को अवश्य पूरा करता है। इसलिए ईश्वर पर विश्वास को बनाए रखें। भगवान पर भक्त का भरोसा भगवान को भक्त की इच्चा पूरी करने के लिए विवश करता है। इस अवसर पर शुकदेव व राजा परिक्षित के स्वरूपों का भक्तों ने पूजन किया। इस अवसर पर मुख्य रूप से समिति के अध्यक्ष शांतिस्वरूप गोयल, महामंत्री उमेश बंसल, अनिल अग्रवाल, संजय गोयल, रश्मि अग्रवाल, श्यामसुन्दर अग्रवाल, मीना, शंकर अग्रवाल, बीना, गोपाल गुप्ता, अशोक रामदास अग्रवाल, अविराग, सुखदेव बिरला, रमेशचंद मित्तल, भगवानदास बंसल, अंशु अग्रवाल, रुचि, रश्मि सिंघल, मधु गोयल, रितु, सीमा बंसल, मीनू त्यागी, सीमा अग्रवाल आदि मौजूद थे।
सामाजिक विशयों पर भी की चर्चा
आगरा। बच्चों को संस्कारवान बनाइये और निश्चिन्त हो जाइये। बच्चों के सामने आप जैसे कर्म करेंगे और उन्हें जैसे संस्कार देंगे बच्चे वैसा ही करेंगे। किसी की दुनिया में किसी के भी साथ रहे परन्तु भगवान का संग न छोड़िए, मंदिर आते जाते रहिए। भगवान वही करते हैं जो उनके भक्त चाहते हैं।