आगरालीक्स…Agra News : आगरा के आंबेडकर विवि में रशियन, फ्रैंच और जर्मन भाषा के लोक गीतों के साथ रूस, फ्रांस और जर्मन संस्कृति देखने को मिली। ( Agra News : Global Harmony Fest in DBRAU, Agra)
डॉ. भीमराव आंबेडकर विश्वविद्यालय के पालीवाल पार्क स्थित जुबली हॉल में गुरुवार को पूरी दुनिया के समाती दिखाई दी। इसमें जहां भारतीयता की झलक परीलक्षित हो रही थी, वहीं रूस, फ्रांस और जर्मन संस्कृति और सभ्यता की खुशबू भी घुली हुई थी। मौका था विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रकोष्ठ (इंटरनेशनल रिलेशन सेल) एवं रूस के मास्को स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल रिलेशन्स विश्वविद्यालय मास्को के बीच हुए समझौता ज्ञापन के अंतर्गत अकादमिक एक्सचेंज कार्यक्रम में रूस से आए विद्यार्थियों के सम्मान में आयोजित ग्लोबल हार्मनी फेस्ट का, इसमें जहां रूसी विद्यार्थियों ने हिंदी और रूसी भाषा के गीतों व नृत्य की प्रस्तुत देकर सभी को आश्चर्यचकित कर दिया, वहीं कन्हैयालाल माणिकलाल मुंशी हिंदी तथा भाषाविज्ञान विद्यापीठ के विदेशी भाषा विभाग के विद्यार्थियों ने भी रशियन, फ्रैंच और जर्मन भाषा के लोक गीतों के साथ वहां के प्रसिद्ध गीत प्रस्तुत किए, साथ ही इन देशों की सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुतियों ने मंत्रमुग्ध कर दिया ।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का प्रारंभ राष्ट्रगीत वंदे मातरम से हुआ । एडीपीएल के छात्र कामरान ने रूसी भाषा का गीत प्रस्तुत किया । छात्र गौरव गौड़ और समृद्धि प्रधान ने रूसी पारंपरिक प्रस्तुति देकर खूब तालियां बटोरी । रूसी विद्यार्थियों अलीना कोलेगोवा, येकतेरीना अफ़ानास्येवा, अंद्रैय पास्तूखोफ़ और येलिसैय गूश्चिन ने ‘है प्रीत जहां की रीत सदा, मैं गीत वहां के गाता हूं, भारत का रहने वाला हूं, भारत की बात सुनाता हूं…’ गीत की प्रस्तुति देकर सभी को प्रफुल्लित कर दिया । इसके बाद उन्होंने हिंदी और रूसी भाषा के अनेक गीतों की प्रस्तुति दी ।

कार्यक्रम का शुभारंभ विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति प्रो. आशु रानी जी ने दीप प्रज्वलित कर किया । उन्होंने आयोजन को बेहद विशिष्ट बताते हुए कहा कि विश्वविद्यालय की माननीय कुलाधिपति अनंदी बेन पटेल जी के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय राज्य और राष्ट्रीय स्तर के साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर तक अपनी पहुंच और संबंध विकसित करने की ओर बढ़ रहा है । के.एम.आई. विभिन्न भारतीय ज्ञान परंपरा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति के मूलाधार वसुधैव कुंटुंबकम् की भावना का संरक्षण कर रहा है, यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात है । यहां से निकली दीपक की रोशनी पूरे विश्व में विश्वविद्यालय के यश का प्रकाश फैलाएगी । उनका कहना था कि इस बात से फर्क नहीं पड़ता कि आप कहां पैदा हुए, लेकिन भाषाओं के ज्ञान से आप दुनिया भर के लोगों को अपना मित्र बना सकते हैं। मुझे लगता है कि विभाग विश्वविद्यालय को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ले जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और यहां संचालित रूसी, फ्रैंच औऱ जर्मन भाषा के पाठ्यक्रमों के माध्यम से, जिन देशों में यह भाषाएं बोली जाती हैं, वहां तक विश्वविद्यालय की पहुंच आसान करेगा।
कुलपति जी ने सभी विद्यार्थियों को निर्देशित किया कि वह कम से कम एक विदेशी भाषा का प्रशिक्षण अवश्य प्राप्त करें जिससे आपके कौशल में वृद्धि हो। उन्होंने रूसी विद्यार्थियों से संवाद करते हुए कहा कि आपने यहां जो सीखा, उसकी छाप आपके दिलों में सदैव रहेगी। आप जहां भी रहेंगे, भारत को याद करेंगे और आपको भी यहां सदैव याद रखा जाएगा।
उन्होंने बताया कि हमने अंतरराष्ट्रीय संबंध सेल का गठन करने के बाद कुछ और परिवर्तन किए हैं, जो विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण हैं। अब यहां के पीएच.डी और पी.जी. के शोधार्थी अपने डिजर्टेशन में विदेशी को सुपरवाइजर को रख सकते हैं। वहीं विद्यार्थी विदेशी शिक्षकों के साथ शोधपत्र तैयार कर सकते हैं। इसके लिए हमने नियमों परिवर्तन कर दिया है।
भारत आकर यहां की आत्मियता भरा प्यार पाकर रूसी विद्यार्थी गदगद दिखे ।
केएमआई के निदेशक प्रो. प्रदीप श्रीधर का कहना था कि यह विश्वविद्यालय के लिए प्रसन्नता का विषय है कि विश्वविद्यालय का रूस के एम.जी.आई.एम.ओ विश्वविद्यालय के साथ हुए इस समझौता ज्ञापन के अंतर्गत वहां के विद्यार्थी यहां आ रहे हैं और यहां के विद्यार्थी वहां जा रहे हैं। विश्वविद्यालय की माननीय कुलपति के प्रयासों से यह प्रयास आगे भी जारी रहेंगे।
माननीय कुलपति ने रूसी विद्यार्थियों को हिंदी सिखाने वाले शिक्षक डॉ. अमित कुमार सिंह, डॉ. मोहिनी दयाल, डॉ. वर्षा रानी, डॉ. रमा और डॉ. शालिनी श्रीवास्तव को प्रमाणपत्र प्रदान किए । संचालन अंतरराष्ट्रीय संबंध सेल के प्रभारी डॉ. प्रदीप वर्मा ने किया। स्वागत डॉ. नीलम यादव और पल्लवी आर्य ने किया। धन्यवाद ज्ञापन अनुज गर्ग ने किया । डॉ. केशव कुमार शर्मा, डॉ. राजकुमार, डॉ. आदित्य प्रकाश, डॉ. संदीप कुमार, श्री विशाल शर्मा, श्री अंगद, डॉ. संदीप सिंह, डॉ. शिरीन जैदी, श्रीमती कंचन, उपेंद्र पचौरी आदि उपस्थित रहे ।
भारत और खासकर विश्वविद्यालय में यह समय बिताना मेरे जीवन का सबसे सुखद क्षण है । मैंने यहां के रीति-रिवाज, जीवन शैली, संस्कार और प्यार देखा। आगरा बहुत खूबसूरत शहर है। यहां रूसी भाषा सीखने और बोलने वाले विद्यार्थियों की सुखद संख्या देख लगता है भारत और रूस के संबंध यूंही सदैव मधुर बने रहेंगे। यह प्रयास सिर्फ सरकारी स्तर पर नहीं, लोगों के व्यक्तिगत स्तर पर भी नजर आता है।
अंद्रैय पास्तूखोफ़, रूसी छात्रा