आगरालीक्स…आगरा में डॉक्टरों का आरोप, अस्पतालों में फायर एनओसी के नाम पर हो रहा उत्पीड़न. आईएमए आगरा ने कहा— जांच के नाम पर हो रही वसूली, उगाही और शोषण, जारी हो रहे तुगलकी फरमान
आगरा के अस्पतालों में इस समय स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार फायर एनओसी सहित अन्य व्यवस्थाओं की जांच की जा रही है. अव्यवस्थाएं व एनओसी न मिलने पर अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. इस संबंध में आईएमए आगरा की संघर्ष समिति की एक बैठक डॉ. अनूप दीक्षित की अध्यक्षता में आईएमए भवन में आयोजित की गई.
आईएमए डॉक्टरों ने कहा कि ‘अग्निशमन जाँच’ के नाम पर चिकित्सकों का उत्पीड़न हो रहा है, सभी ने इस पर चिंता जताई और इस जांच की आड़ में हो रहीं वसूली, उगाही, दोहन, शोषण की कोशिश की कड़ी शब्दों में भर्त्सना की. सभी सदस्यों ने इस बात पर सहमति जताई कि जिस संस्थान को पूर्व में किसी संस्था द्वारा NOC दी गई थी तो उसके द्वारा सभी प्रकार की जांच के बाद ही ऐसा किया गया होगा. अगर उस संस्था विभाग के द्वारा अपना कार्य सही रूप से संपादित नहीं किया गया तो इस बात की जांच होनी चाहिए और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. चिकित्सक का काम है इलाज करना और मरीजों की जान बचाने के लिए अपनी पूरी शक्ति, सामर्थ लगा देना. अगर अब निकली जा रही आपत्तियां पहले ही बता दी गई होती तो कोई भी चिकित्सक अपने खून पसीने की कमाई को अभीष्ट स्थान पर अपने ‘चिकित्सा प्रतिष्ठान’ के निर्माण में लगाता ही क्यूँ? जहाँ कार्य किया ही नहीं जा सकता.
चिकित्सकों ने कहा कि यह भी समझ से बाहर पाया गया कि डॉक्टर समुचित अग्निशमन उपकरण, अग्नि सुरक्षा के संभव साधन न लगा कर क्यूँ किसी मरीज की, स्वयं की अपने स्टॉफ की जान खतरे में डालेगा क्यूंकि वे सभी भी तो उसी स्थान पर कार्यरत हैं. अधिकांश अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र आवश्यकता अनुसार लगे हुए हैं और बाकायदा क्रियाशील हैं और यदि छोटी मोटी कोई कमी मिली भी है तो उसे वो पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध हैं. परंतु हमें ना तो बताया जा रहा है कि कमी क्या है और ना ही समय दिया जाता है बस एक तुगलकी फरमान जारी कर दिया जाता है कि कल से अमुक ‘चिकित्सा प्रतिष्ठान’, अस्पताल संचालित नहीं होगा. तो वहां कार्यरत चिकित्सक, स्टाफ क्या करें? कैसे अपनी आजीविका चलाएं?
IMA आगरा सभी विभागों से अपेक्षा करती है कि वह मानवीय एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्णय लें, जिससे किसी भी चिकित्सक को अस्पताल संचालन में अकस्मात ही कोई आकस्मिक परेशानी नहीं हो. यदि शीघ्र ही पीड़ित चिकित्सा संस्थानों को इस दोहन एवं शोषण के लिए की जा रही अनुचित कार्यवाही से राहत नहीं मिली तो IMA सम्बंधित अधिकारियों की न केवल पोल खोलने अपितु सड़क पर उतर तीव्र आंदोलन करने को बाध्य होगा. क्यूंकि फिर शहर के लगभग सारे अस्पताल तो चिकित्सा सेवा हेतु अर्ह ही नहीं रहेंगे. इससे आम जन एवं मरीज़ों को नाहक ही परेशानी का सामना करना पड़ेगा.
बैठक में डॉ हरेंद्र गुप्ता ,डॉ सुधीर धाकरे ,डॉ मुनीश्वर गुप्ता ,डॉ शरद गुप्ता, डॉ अरुण सिंह ,डॉ जे. एन.टडन, डॉ सीमा सिंह, डॉ मुकेश भारद्वाज, डॉ मनोज शर्मा, डॉ मानवेंद्र शर्मा, डॉ संगीता, डॉ सुवीर गुप्ता, डॉ पायल सक्सेना, डॉ अरविंद यादव, डॉ देवेन्द्र गुप्ता, डॉ रणवीर त्यागी एवं अन्य उपस्थित रहे.
- 5 December 2024 Agra News
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